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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल से गुंजायमान हुआ पांडाल


सीहोर। शहर के भोपाल नाका मुरली रोड पर सार्वजनिक भागवत उत्सव समिति के तत्वाधान में जारी संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान पांडाल में चारों तरफ नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के स्वर गुंजाएगामन हो रहे थे। परिसर को बड़े ही आकर्षक तरीके से सजाया गया था। एक पालने में भगवान कृष्ण को झूला झुलाने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही थी। श्रद्धालु भजनों की धुनों पर नाचते-गाते नजर आ रहे थे। शुक्रवार को कृष्ण लीला, गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग लगाया जाएगा।

गुरुवार को कथा के चौथे दिन पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले कंस के राज्य से प्रजा दुखी थी। कंस ने अपने बाप को राजगद्दी से अपदस्थ कर स्वयं कब्जा कर लिया था, वह आततायी था। उसने अपनी बहन देवकी का विवाह वसुदेव के साथ किया। विवाह के बाद जब वह अपनी बहन को पहुंचाने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई कि कंस तू जिसे पहुंचाने जा रहा है उसी देवकी का बेटा तुम्हारा काल होगा। इसके बाद कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया और बारी-बारी से उसकी सभी संतान का वध कर दिया। इस मौके पर श्रीकृष्ण जन्म की झांकी ने सभी का मनमोहा। श्रद्धालुओं ने भजनों पर झूमते हुए श्रीकृष्ण को जन्म की बधाई दी। उन्होंने कहा कि त्रेता युग में भगवान विष्णु की भक्ति को सर्वस्व माना है। द्वापर युग में तप को विशेष महत्व दिया है। कलियुग में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण को मोक्ष के द्वार का रास्ता माना है। कलयुग में आयु कम है। इसलिए भागवत कथा श्रवण से मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। राजा पारीक्षित को कथा श्रवण के सात दिन बाद मोक्ष मिला था। भगवान की निस्वार्थ भाव से अनन्य भक्ति करना चाहिए। भगवान से कुछ न मांगे। प्रभु भक्ति करते रहे। प्रभु खुद फल देते है। सारे पापों का नाश करते है।

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