नर्मदा और तवा के संगम स्थल बांद्राभान मेला में उमड़ा श्रद्धा का सेलाब

कार्तिक पूर्णिमा पर दो लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी


रश्मि गौड़।

नर्मदापुरम (निप्र) । बांद्राभान मेला ने नर्मदांचल के सबसे बड़े मेला के रूप में प्रसिद्ध है। कोरोना काल में दो वर्ष मेला नहीं लग सका। इस मेला में सबसे अधिक ग्रामीण अचंलों के श्रद्धालुओं का जमावड़ा बना हुआ है। चंद्र ग्रहण के कारण कार्तिक पूर्णिमा के साथ दूसरे दिन भी स्नान का क्रम रहेगा। क्योंकि कई लोग रात में मेला स्थल पर ही ठहरे हुए हैं। वैसे तो कार्तिक पूर्णिमा से एक दिन पूर्व से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु मेला में पहुंच चुके थे। सोमवार को शाम तक हजारों की संख्या में दुकानें सज चुकी थी। एक दर्जन झूले लगे हुए हैं। मेला स्थल पर आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का सपरिवार अपने ट्रैक्टर ट्रालियों और चार पहिया वाहन तथा बैल गाडियों से मेला में पहुंचने का सिलसिला जारी हैं। आज भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

संगम स्थल पर लगी डुबकी

नर्मदा और तवा के संगम स्थल बांद्राभान के रेतीली मैदान में करीब 05 एकड़ क्षेत्र में मेला लगा हुआ है। दुकाने बड़ती जा रही हैं। पूर्णिमा के पावन अवसर पर सूर्यदेव की पहली किरण निकलने से पहले ही स्नान का क्रम शुरू हो गया था। जो आज भी जारी रहेगा।

गहरे पानी और चोर रेत से खतरा

नर्मदा और तवा के संगम स्थल पर इस वर्ष अभी जल स्तर बड़ा हुआ है। वहाव भी है। इसके अलावा यहां पर जो चोर रेत है। उसमें स्नान करने के दौरान पैर अंदर घुसते जाते हैं। जिससे बचने के लिए ज्यादा गहरे पानी में नहीं जाना चाहिए। बड़ी मात्रा में गोताखोर तथा होमगार्ड जवान और पुलिस बल तैनात किया गया है।

लगाई लाल झंडियां बनाया घेरा

संगम स्थल पर मेला आयोजन समिति व जनपद पंचायत के कर्मचारियों, होम गार्ड जवानों ने नर्मदा और तवा के उस संगम स्थल पर लाल झंडयां लगा दी हैं जहां पर सबसे ज्यादा स्नान करने वाले पहुंचते हैं उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस बल और होम गार्ड सैनिक तैनात हैं।

मोटर वोट से की जा रही निगरानी

संगम स्थल पर स्नान करने वालों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए होमगार्ड सैनिकों ओैर पुलिस बल के द्वारा मोटर वोट से पेट्रालिंग की जा रही है। वहीं जिला मुख्यालय से गोताखोर भी संगम स्थल पर भेजे गए हैं। स्थानीय नावों के जरिए भी नजर रखी जा रही है।

वाहन पार्किंग को लेकर बहस

मेला में वाहन लेकर पहुंचे लोगों के साथ ठेकेदार के कर्मचारियों के द्वारा रसीद कट्टा दिखा कर उनसे राशि देने का दबाव बनाया जा रहा है। जबकि कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ चार पहिया वाहन लेकर पहुंचे उनसे पार्किंग शुल्क लिए जाने के कारण बहस हो रही थी। इन वाहन के ठेकेदार के कर्मचारियों ने लोगों के साथ बहस की ठंडे लेकर वाहन रोक कर बगीचे में रूकवा रहे थे।

मेला अवधि बढ़ाने की मांग

मेला में झूला मालिक अहमद ने कहा कि वह ट्रक से झूले का सामान लेकर आए हेैं। सिर्फ एक दो दिन का मेला रहने से जो खर्च हेाता है वही निकल पाता है। इस कारण मेला की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए। इसी तरह एक श्रद्धालु रामदीन ने कहा कि मेला को तीन से चार दिन का जरूर करना चाहिए। जिससे बेरोजागारों के द्वारा जो दुकान लगाई जाती हैं उनसे उन्हें कुछ आमदनी हो सके। क्योंकि सरकार सभी को रोजगार देने में सफल नहीं हो पाती फिर ऐसे मेला लग रहे हों उन स्थानों पर एक दिन बाद ही वापस दुकान लाने ले जाने में खर्च बहुत हो जाता है।

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