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जि़ंदगी में हरदम तूफान का उफान

अतुल कनक

कोरोना की आंधी कम थी हमारे हौसलों को चुनौती देने के लिए, जो अब जान-जान पर नये-नये तूफान चले आ रहे हैं। अभी अम्फान के निशान पूरी तरह मिटे भी नहीं थे कि निसर्ग झूमता हुआ चला आया। कहीं भूकंप आंख दिखा रहे हैं तो कहीं टिड्डियां हमारी खिल्ली उड़ा रही हैं। आदमी समझ ही नहीं पा रहा है कि हवा में खांसते हुए खौफ़ का सामना करे या समुद्र में सरसरा रहे संकट का?

इस देश का आदमी तूफानों से आसानी से नहीं डरता। तूफानों का क्या है? आम आदमी की जि़ंदगी में कहीं से भी चले आते हैं। मकान का किराया चुकाने में कुछ दिनों की देर हो जाए तो मकान मालिक जि़ंदगी में तूफान ला देता है। बिजली का बिल चुकाने में देरी हो जाए तो बिजली वाले दरवाजे पर आकर खड़े हो जाते हैं। बच्चों की फीस चुकाने में देरी हो जाए तो स्कूल वाले बता देते हैं कि जि़ंदगी में तूफान आने पर कैसा लगता है।

आम आदमी हर क्षण तूफानों से घिरा रहता है। वह तो यह भी नहीं जानता कि बड़ी मेहनत से उसने जिन नोटों को कमाकर कुछ दिन पेटभर रोटी खाने का सपना देखा है, वह नोट अगले दिन चलेंगे या नहीं। हालांकि, आम आदमी के जेब में उतने बड़े नोट मुश्किल से ही आ पाते हैं जिन्हें रातोंरात प्रचलन से बाहर कर दिया जाता है। बड़े नोटों की चिंता करना, बड़े आदमियों का काम है। मुसीबत यह है कि बड़े आदमी यदि चिंता में होते हैं तो भी आम आदमी की जि़ंदगी में तूफान आ जाता है। मसलन, बड़ा आदमी लॉकडाउन के कारण अपना कारखाना बंद करके चिंता में आ गया। इसके बाद आम आदमी की जि़ंदगी में ऐसा तूफान आया कि उसे संभलने तक का मौका नहीं मिला। बेचारे को पैदल-पैदल अपने गांव की ओर भागकर जान बचानी पड़ी। लेकिन गांव में बेरोजगारी का तूफान उसे चुनौती नहीं देगा, इस बात की क्या गारंटी है?

अब समुद्र उफनने लगा है। समुद्र उफन रहा है। रह-रहकर उफन रहा है। यह उफान ही तूफान बन जाता है। उफान तो आम आदमी के दिल में भी आता है, लेकिन उस बेचारे की इतनी सामर्थ्य कहां कि अपने अंदर के उफान को तूफान में बदलने दे।

अब हालत यह है कि आम आदमी को चारों तरफ से तूफानों ने घेर लिया है। वह समझ ही नहीं पा रहा है कि वुहान के वायरस से लड़े या बेरोजगारी के करुण रस से। लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानने की ठानी है। आम आदमी का यही जज्बा सारे तूफानों को लौटने पर मजबूर कर देता है। उम्मीद है कि यह तूफान भी आम आदमी के हौसलों को डरा नहीं सकेगा।


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