• dainik kshitij kiran

ज्ञान के चिराग


मैरी मैक्लियॉड बेथून को बचपन से ही पढऩा बेहद पसंद था। जैसे-जैसे वह बड़ी होती रही, वैसे-वैसे उन्होंने अश्वेतों के साथ होने वाले भेदभाव को महसूस किया। कई प्रतिभाशाली अश्वेत विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते थे। एक दिन उसने दृढ़ निश्चय किया कि वह ऐसे कॉलेज का निर्माण करेगी, जहां पर सभी विद्यार्थी समान शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे। मैरी ने लोगों की बातों की परवाह किए बिना अपने प्रयास को जारी रखा। उन्होंने कॉलेज के लिए डेटोना बीच, फ्लोरिडा का स्थान चुना। जब उन्होंने अपना शैक्षणिक संस्थान प्रारंभ किया तो उनके पास केवल छह डॉलर थे, पर वे डटी रहीं। उसने किसी की परवाह नहीं की। वह निरंतर अपने पथ पर आगे बढ़ती रहीं। उन्होंने पहले अफ्रीकी-अमेरिकी कन्याओं के लिए स्कूल खोला। कुछ समय बाद यह स्कूल एक निजी संस्थान में परिवर्तित हो गया। अब इसमें अफ्रीकी अमेरिकी युवा भी पढऩे लगे। शीघ्र ही इस संस्थान को बेथून कुकमैन स्कूल के नाम से जाना जाने लगा था। धीरे-धीरे यह स्कूल कॉलेज में बदल गया। आज बेथून कुकमैन कॉलेज विश्व के उच्च शिक्षा के सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में से एक है। मैरी मैक्लियॉड अमेरिका की महानतम महिलाओं में गिनी जाती हैं, जिन्होंने छोटी-सी आशा के साथ शुरुआत की और सबके लिए शिक्षा के चिराग जला दिये।

प्रस्तुति : रेनू सैनी

0 views0 comments

Recent Posts

See All

सोने की लंका लुटी पांच सितारा उपचार में

आलोक पुराणिक कबीरदास सिर्फ संत ही नहीं थे, अर्थशास्त्री थे। उनका दोहा है—सब पैसे के भाई, दिल का साथी नहीं कोई, खाने पैसे को पैसा हो रे, तो जोरू बंदगी करे, एक दिन खाना नहीं मिले, फिरकर जवाब करे। सब पैस

पश्चिम बंगाल में चुनावी कटुता भुलाने का समय

कृष्णमोहन झा/ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र की मोदी सरकार के बीच टकराव का जो सिलसिला ममता बनर्जी के दूसरे कार्यकाल में प्रारंभ हुआ था वह उनके तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही पहले स

उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हो ऋ ण

भरत झुनझुनवाला वर्तमान कोरोना के संकट को पार करने के लिए भारत सरकार ने भारी मात्रा में ऋण लेने की नीति अपनाई है। ऋण के उपयोग दो प्रकार से होते हैं। यदि ऋण लेकर निवेश किया जाए तो उस निवेश से अतिरिक्त आ