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छोटी बातों से हासिल बड़े लक्ष्य



अमिताभ

कोरोना काल के दौरान कई महीने घर में क़ैद रहकर, आम दिनों में रोज़ सुबह से रात काम के सिलसिले में बाहर रहने वाले लोग भी जान गए कि घर के पानी के मोटर का स्विच कहां है या चाय की छननी रसोई के किस आले में रखी है। आम लोगों ने बेशक मजबूरी में छोटी-छोटी चीजों पर गौर करना सीखा है, लेकिन बुलंदियों को छूते तमाम शख़्स अपने छोटे-छोटे कामों और छोटी-छोटी बातों पर गौर करने की आदत को प्रतिभा निखारने की सीढ़ी मानते हैं। टाटा समूह के सर्वेसर्वा रतन टाटा तमाम व्यस्तताओं के बावज़ूद आम दिनों में भी अपने दोनों पालतू कुत्तों का ख्याल ख़ुद ही रखते हैं।

उधर वीएलसीसी की संस्थापक वंदना लूथरा को अपने कम से कम 1000 मुलाजिमों और उनके पति-पत्नियों के नाम तक याद हैं। सिने स्टार शाहरुख़ ख़ान और उनकी पत्नी गौरी ख़ान अपने घर आए मेहमानों को ख़ुद अपने हाथों से ड्रिंक्स पेश करते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खड़े होकर अपने मेहमानों का अभिनंदन करते हैं और उन्हें अपने हाथों से चाय सर्व करते हैं।

एक दफ़ा मैंने ऐसा महसूस किया कि हमारे घर एक किशोर रोज सुबह अपनी मां के संग कूड़ा उठाने कई साल से आ रहा था। आस-पड़ोस के लोग उसे ‘ओए’, या ‘अबे’ या फिर ‘छोटू’ कहकर पुकारते थे। एक रोज़ मैंने उससे नाम पूछा, तो वह बोला ‘सा’ब, मैं तो अपना नाम ही भूल गया हूं। कोई हमें हमारे नाम से पुकारता ही कहां है ’ उस दिन से मैंने उसे नाम से क्या पुकारना शुरू किया, मेरे प्रति उसके रवैये में व्यापक बदलाव आया। वह हमारा काम सबसे पहले और अहमियत देकर करने लगा।

मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि बिज़ी शेड्यूल के बावजूद कोई अपने जूते किस सलीक़े से रखता है, यह भी उसकी तरक़्क़ी की राह में ख़ासा मददगार बनता है। नेपोलियन बोनापार्ट तो साफ़ शब्दों में कहते हैं, ‘अगर किसी काम को सबसे बेहतर तरीक़े से करना है तो उसे ख़ुद ही करो।’

कर्म का रहस्य यही है कि हम अपना छोटे से छोटा काम भी करें तो पूर्ण निष्ठा, श्रद्धा और आस्था से करें। यही अध्यात्म है। सम्राट चंद्रगुप्त मोर्या के शासनकाल की बात है। उनके राज्य में एक चोर था। चोरी भी निष्ठा के साथ करता था। जब वह सेंध लगाने जाता तो ऊटपटांग तरीक़े की बजाय बड़े सलीक़े से दीवार की ईंटें निकालता और फिर सेंध लगा कर घर में घुसता। एक रात उसके साथी ने पूछा, ‘चोरी ही तो करनी है। फिर सेंध लगाने में तुम इतनी कलाकारी करने में समय क्यों गंवाते हो कहीं इसी कलाकारी के चक्कर में तुम धरदबोचे गए तो ’ चोर बोला, ‘चोरी मेरी रोज़ी-रोटी है। इसीलिए चोरी भी मैं पूजा की तरह करता हूं। कोई कहे कि वाह! क्या चोर है, चोरी भी करता है, तो बड़े सलीक़े से।’ एक संत ने जब उसकी लगाई सेंध देखी, तो चकित रह गए। उन्होंने उसे ढूंढ़ ही लिया। उसे साधना और ध्यान की पद्धतियां सिखाईं। जल्द ही उसने कर्म और निष्ठा से आध्यात्मिक उपलब्धियां हासिल कर लीं और विख्यात संत बन गया।

लाइफ़ मैनेजमेंट के गुर भी सिखाते हैं कि आप की कुछेक छोटी-छोटी आदतें क्रांतिकारी फ़ायदे पहुंचाने में सक्षम हैं। बेशक़ आप कारोबारी हैं या नौकरीपेशा, लेकिन रोज तय समय पर दफ़्तर या दुकान पहुंचते हैं तो लोगों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है कि आप बेहद अनुशासित हैं। अगर आप किसी की या कोई आपकी छोटी-छोटी बातें याद रखता है और खुद-ब-खुद बातों-बातों में ज़ाहिर करता है, तो आपका उस पर फि़दा होना स्वाभाविक है। जैसे अगर आप किसी कम मिलने वाले मेहमान के लिए चाय ऑर्डर करते हैं और बोल पड़ें, ‘अरे, आप तो फीकी चाय पीते हैं।’ या कहें, ‘बिस्किट-विस्किट भी लाना क्योंकि ये ख़ाली चाय नहीं पीते।’ तो वह गद्गद हो जाएगा।

एक छोटी-सी बात और। जब किसी के लिए दरवाज़ा खोलते हैं और उसके भीतर आने या बाहर जाने का इंतज़ार करते हैं, तो आपके प्रति उसका रवैया सकारात्मक होना लाजि़मी है। दरवाज़ा कार, लिफ़्ट, घर, दफ़्तर या कहीं का भी हो सकता है। उसे लगता है कि आप बेहद विनम्र स्वभाव के हैं। महज़ ऐसा करने से आपके काम सफल होने की रफ़्तार बढ़ जाती है। ऐसे ही रोज सुबह-सवेरे 5 बजे के आसपास उठने से आप का व्यक्तित्व निखर उठता है। आधे से अधिक सफल कलाकार, साहित्यकार और बुद्धिजीवी सुबह-सवेरे मार्गदर्शन के लिए सर्वोत्तम समय मानते हैं क्योंकि अपने काम के समय से कम से कम 3 घंटे पहले उठने वाले अपने जीवन का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में थाम लेते हैं। अपने दिन को बखूबी प्लान करते हैं, अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ख़्याल रखते हैं। और फिर, तडक़े जागने का समय क्रिएटिव आइडियों के लिए सौग़ात बनकर तो उभरता ही है।

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