• dainik kshitij kiran

चीन भारत तनाव

अशोक मिश्र


कोरोनॉ वायरस से उपजे संकट से घिरा चीन अपनी खीझ व खिसियाहट को किसी न किसी पर उतारना ही था।भारत की पहले आक्रमण न करने की नीति ने भी हदतक भारत के लिए मुश्किलें पैदा की है। कुछ दिन पहले नेपाल जैसा देश जिनकी हैसियत हमारी उत्तर प्रदेश पुलिस से भी उलझने की नहीं हैं उसने भी हमारे नागरिकों को निशाना बनाया। दुनिया अच्छे से जानती हैं कि भारत कभी भी किसी देश की सीमा का अतिक्रमण नहीं करता। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना को अब थोड़ा आक्रामक होना होगा। भारत के पड़ोसी देश,चीन,नेपाल,भूटान, पकिस्तान, इन सबमे एक बात कॉमन हैं कि यहाँ लोकतंत्र नहीं हैं मतलब इन सारे देशों को या तो कोई एक आदमी चलाता हैं या फिर सेना। ऐसे में भारत अहिंसा परमो धर्म: की नीति पर कैसे चल सकता हैं।इसके बरक्स भारत में 70 साल से लोकतंत्र मजबूत हुआ हैं इतनी विविधता के बावजूद भारत न केवल अपने नागरिकों की वरन पूरे विश्व में शांति की कामना करने वाला राष्ट्र हैं।

अब वक्त गया हैं कि दलाई लामा तिब्बत,हांगकांग,ताइवान, को मदद व महत्व दें साथ ही साथ पकिस्तान के कालोनी बलोचिस्तान व वजीरिस्तान फाटा को भी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाये। तमाम रक्षा विशेषज्ञ इस बात पर एक पेज पर हैं कि चीनी सेना के पास युद्ध का कुछ खास अनुभव नहीं हैं मतलब अभी तक चीन की सेना का टेस्ट नहीं हुआ हैं।अगर चीन भारत को युद्ध की तरफ ले जाता हैं तो चीन से नाराज देश जापान,ऑस्ट्रेलिया,फिलीपीन्स,दक्षिण कोरिया,अमेरिका,भले भारत के साथ युद्ध न लड़ें पर भारत के साथ खड़े दिख सकते हैं और यह बात चीन भी अच्छी तरह जानता हैं।जो काम चीन ने हमारी सीमा में आकर करता हैं अब वही काम भारत को करना होगा।अब भारत को चाहिए की चीन की सीमाओं में जाकर यहीं काम करें जब चीन को दुनिया ऐसा करने से नहीं रोकती तो भारत को भी नहीं रोकेगी।भारत जबतक रक्षात्मक रहेगा तबतक समस्या बनी रहेगी।अब भारत सरकार को अपने दुश्मनों से सख्ती से निपटने की दरकार हैं। युद्ध किसी समस्या का हल नहीं पर युद्ध को बहुत टालना भी भारत के हित में नहीं।

1 view0 comments

Recent Posts

See All

सोने की लंका लुटी पांच सितारा उपचार में

आलोक पुराणिक कबीरदास सिर्फ संत ही नहीं थे, अर्थशास्त्री थे। उनका दोहा है—सब पैसे के भाई, दिल का साथी नहीं कोई, खाने पैसे को पैसा हो रे, तो जोरू बंदगी करे, एक दिन खाना नहीं मिले, फिरकर जवाब करे। सब पैस

पश्चिम बंगाल में चुनावी कटुता भुलाने का समय

कृष्णमोहन झा/ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र की मोदी सरकार के बीच टकराव का जो सिलसिला ममता बनर्जी के दूसरे कार्यकाल में प्रारंभ हुआ था वह उनके तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही पहले स

उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हो ऋ ण

भरत झुनझुनवाला वर्तमान कोरोना के संकट को पार करने के लिए भारत सरकार ने भारी मात्रा में ऋण लेने की नीति अपनाई है। ऋण के उपयोग दो प्रकार से होते हैं। यदि ऋण लेकर निवेश किया जाए तो उस निवेश से अतिरिक्त आ