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गैर विस्थापित लोग उठा रहे योजनाओं का लाभ, क्षेत्र की जनता में आक्रोश

बुनियादी सुविधाओं से मोहताज सुशीलनगर की जनता



सीहोर। जिले के रजत जयंती ग्राम सिद्दीक गंज के अंतर्गत आने वाले सुशील नगर के निवासी पिछले दो दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं इस ग्राम को तत्कालीन भोपाल के सांसद सुशील चंद्र वर्मा ने बसाया था इस ग्राम में रामपुरा डेम कि डूब में आने वाले लगभग 6 गांवों के निवासियों को विस्थापित किया गया था तत्कालीन मुख्यमंत्री और सांसद श्री वर्मा ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि उन्हें नियम अनुसार आर्थिक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी इसके बावजूद ग्रामीणों को सुशील नगर में किसी भी प्रकार की जीवन यापन की सुविधाएं नहीं दी गई है।  इस संबंध में ग्राम के कमल किशोर सोलंकी, थावर सिंह, भोलू राम, भेरु सिंह, कचरुलाल, पद्म, राजाराम, धर्मेन्द्र, संतोष, मुश्ताक खां, ललता बाई, पेलू बाई, रहीशा बी, कुसुम बाई, गंगा बाई और बाबू खा ने बताया कि हालत यह है कि यहां की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई है और एक प्राइमरी स्कूल भवन भी जर्जर अवस्था में आ चुका है ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस ग्राम के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना और भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे शौचालय अभियान के अंतर्गत बनने वाले शौचालय भी इस गांव को नहीं मिले हैं सुशील नगर में अधिकतर ग्रामीण अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति वर्ग के हैं जिन्हें मजदूरी के लिए अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है साथ ही रामपुरा डैम से मछली आखेट करने के लिए यहां के निवासियों ने एक मछुआरा समिति का गठन भी किया था कुछ समय पूर्व तक इन ग्रामीणों को ही मछली आखेट करने की सुविधा उपलब्ध थी इसके बाद अन्य ग्रामों के गैर विस्थापित ग्रामीणों ने शासकीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते अपना कब्जा जमा लिया और जो वास्तविक विस्थापित ग्रामीण थे उन्हें मछली आकर से वंचित कर दिया गया सिद्धिगंज वर्तमान में महिला सरपंच है लेकिन उनके पति सरपंची का काम देखते हैं जब इस संवाददाता ने पंचायत भवन में जाकर महिला सरपंच से मिलने की कोशिश की तो पता चला कि सरपंच की कुर्सी पर सरपंच पति विराजमान है। मछुआ समिति में विस्थापित ग्रामीणों को शामिल नहीं किया गया तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे उनका कहना है कि सुशील नगर के ग्रामीण जन को नियम के अनुसार सुविधाएं दी जाती हैं उनके साथ किसी भी प्रकार का कोई पक्षपात नहीं किया जाता है लेकिन स्थिति इसके ठीक उलट है हालत यह है कि मिडिल स्कूल की पढ़ाई करने के लिए भी सुशील नगर के बच्चों को 2 किलोमीटर दूर सिद्धि गंज में पढ़ाई करने के लिए जाना पड़ रहा है इसी तरह यदि बारिश के दिनों में कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसे तत्काल मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाती है इसकी वजह यह है कि सिद्धि गंज और सुशील नगर के बीच एक रबता पड़ता है जिस में पानी भर जाने के कारण यह रास्ता बंद हो जाता है इसके चलते कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है इस संबंध में सुशील नगर के कुछ ग्रामीणों ने पिछले दिनों सीहोरा कर कलेक्टर अजय गुप्ता और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरुण विश्वकर्मा को ज्ञापन भी दिया है हालांकि अभी तक उस ज्ञापन पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है लगभग 430 सौ लोगों की आबादी वाले इस ग्राम में अभी तक कोई भी अधिकारी उनकी सुध लेने के लिए नहीं पहुंचा है देखना यह है कि आने वाले समय में इन ग्रामीणों की सुनवाई होती है या नहीं एक ग्रामीण कमल सिंह ने बताया कि अगर 1 सप्ताह के अंदर उनकी सुनवाई नहीं हुई और रामपुरा डैम की मछुआ समिति में विस्थापित ग्रामीणों को शामिल नहीं किया गया तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सिद्धि गंज के सरपंच जिला पंचायत एवं कलेक्टर की होगी।

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