खाड़ी से घर वापसी

खाड़ी देशों में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीयों के सामने रोजी-रोटी का संकट बढ़ता जा रहा है, इसलिए अब वे अपने देश लौटना चाहते हैं। भारत सरकार ने भी उन्हें वापस लाने का मन बना लिया है। संयुक्त अरब अमीरात में डेढ़ लाख से ज्यादा भारतीयों ने घर लौटने के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया के तहत भारतीय मिशनों में आवेदन दिया है। लॉकडाउन के कारण वहां फंसे तथा घर लौटने के इच्छुक भारतीयों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पिछले सप्ताह शुरू की गई थी। यूएई में भारत के महा वाणिज्यदूत के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में आवेदन शनिवार की शाम छह बजे तक ही प्राप्त हो चुके थे। इन डेढ़ लाख आवेदनों में से एक चौथाई ऐसे लोगों के हैं जो अपनी नौकरी गंवाने के बाद स्वदेश लौटना चाहते हैं। रजिस्ट्रेशन कराने वाले करीब 40 फीसदी आवेदक श्रमिक हैं जबकि 20 प्रतिशत प्रफेशनल्स हैं। इनमें से 55 फीसदी अकेले केरल से हैं, हालांकि संभावना जताई जा रही है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना जैसे प्रदेशों के श्रमिक भी रजिस्ट्री कराएंगे। वैसे करीब 10 फीसदी आवेदन पर्यटकों के भी हैं, जो भारत में जारी लॉकडाउन के कारण वहां फंस गए हैं। ईरान और अन्य खाड़ी देशों में फंसे छात्रों, कामगारों, मजदूरों और मछुआरों को भी वहां से निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। गौर से देखें तो खाड़ी देशों में इतनी बड़ी तादाद में रहने वाले भारतीयों की मुश्किलें महज कोरोना वायरस से नहीं जुड़ी हैं। वहां उनकी जीविका मुख्यत: तेल बाजार से निकलती है, जो साल की शुरुआत से ही मार खा रहा है। इससे इस क्षेत्र की संपदा कम हुई है और कई कंपनियों के बंद होने की नौबत आ गई है। भारतीय श्रमिकों की एक बड़ी संख्या कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में कार्यरत रही है जो बिल्कुल ठप पड़ा है। उनकी बेरोजगारी का असर भारत भेजी जाने वाली उनकी 50 अरब डॉलर कमाई पर भी पड़ेगा, जो भारत के लिए बड़ा झटका है। बहरहाल, भारतीयों को वहां अनिश्चितता की स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता। उन्हें लाने के लिए खाड़ी के क्षेत्र में नौसेना और वायुसेना को अपने युद्धपोतों और विमानों को स्टैंडबाय में रखने के लिए पहले ही कहा जा चुका है।भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने पिछले दिनों कहा कि हमने अपने पोत तैयार कर लिए हैं और जैसे ही भारतीय कामगारों को निकालने के आदेश मिलते हैं, हम निकल पड़ेंगे। प्रोटोकॉल के मुताबिक विदेश से लौटने पर 14 दिन का क्वारंटीन जरूरी होगा। इस बारे में पिछले दिनों केंद्र और राज्यों में विस्तृत चर्चा हुई थी और राज्यों ने विदेश से आने वाले भारतीयों के लिए जरूरी सुविधाएं जुटाना शुरू कर दिया था। फैसला यही था कि लॉकडाउन खुलने के बाद युद्ध-स्तर पर भारतीयों को स्वदेश लाने का अभियान चलाया जाएगा। लेकिन लॉकडाउन 3 मई से बढ़ाकर 17 मई तक कर दिए जाने के बाद इस अभियान की शुरुआत कब होगी, कहा नहीं जा सकता। उम्मीद करें कि खाड़ी में फंसे सभी भारतीयों की घर वापसी जल्द ही संभव हो सकेगी।

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