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किसान-शिक्षा की सुध

भाजपा-जजपा सरकार का पहला बजट इस मायने में भी खास रहा कि बजट मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पेश किया। वह भी सूटकेस में नहीं, टैब के जरिये, यानी डिजिटलीकरण की तरफ भी एक कदम। बजट को इस मायने में मनोहारी कह सकते हैं कि इसमें कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया। बाकी लोकलुभावन बजट, सौगात ही सौगात। किसानों पर सरकार ने खास ध्यान दिया है। एक तो किसानों के लिये बिजली सस्ती की गई है, वहीं विपणन, छोटी सिंचाई योजनाओं समेत ग्राम पंचायतों के लिये अतिरिक्त आर्थिक सहायता का वायदा किया गया। कुल मिलाकर मनोहर सरकार ने कृषि, शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया है। मुख्यमंत्री ने 142343.78 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जबकि पिछला बजट 1.32 लाख करोड़ का था। हरियाणा सरकार ने पढ़ा-लिखा हरियाणा बनाने की कवायद में पहली बार शिक्षा पर 15 फीसद खर्च का निर्णय लिया है। सरकार भले ही नया टैक्स न लगाये मगर सरकार की चिंता राज्य की वित्तीय सेहत को लेकर जरूर होनी चाहिए। यह चिंता की बात है कि चालू वित्तीय वर्ष का 1.76 लाख करोड़ रुपये का कर्ज वित्तीय वर्ष 2020-21 में बढक़र करीब दो लाख करोड़ के आसपास रहने का अनुमान है। ऐसे में राज्य की वित्तीय सेहत बनाये रखने के लिये नये वित्तीय स्रोतों के बार में सोचना चाहिए। हालांकि, सरकार जीएसटी संग्रहण में वृद्धि को उपलब्धि बता रही है। ऐसे वक्त में जब देश-दुनिया रासायनिक खादों व कीटनाशकों के प्रयोग वाली खेती से चिंतित है, सरकार ने जैविक व प्राकृतिक खेती की तरफ कदम बढ़ाए हैं, जिसके लिये अल्प बजट प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने की विभिन्न योजनाओं पर अमल करने की बात कही गयी है। जो राज्य की मिट्टी की सेहत और जनता के स्वास्थ्य के लिये सकारात्मक पहल कही जायेगी।

जल संकट की आहट को महसूस करके सरकार ने फसलों के विविधीकरण पर जोर दिया है। फसल विविधीकरण को अपनाने वाले किसानों को पुरस्कृत किया जायेगा। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि आगामी तीन वर्षों में एक लाख एकड़ में जैविक व वैकल्पिक खेती का विस्तार किया जायेगा। इसके लिये उपयुक्त धनराशि का बजट में आवंटन किया गया है। साथही राष्ट्रीयकृत बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों को ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा प्रदान की जायेगी। नि:संदेह इसी दिशा में बिजली के दाम कम करके सरकार ने किसानों को एक सौगात देने की कोशिश की है। अब किसानों को 7.50 रुपये के बजाय 4.75 रुपये प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा। कहीं न कहीं बजट में भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के साझा न्यूनतम कार्यक्रम की झलक नजर आती है। सरकार ने यूं तो वित्तीय वर्ष में एक लाख नये रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है, मगर शिक्षा को रोजगारन्मुख बनाने को भी अपनी प्राथमिकता बनाया है। वैशाखी पर सरकार युवाओं के लिये एक नया रोजगार पोर्टल खोलेगी। विभिन्न उच्च शिक्षा व तकनीकी संस्थानों के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिये मुफ्त पासपोर्ट बनाने की घोषणा, सरकार की मंशा प्रतिभाओं के लिये विदेश में रोजगार के अवसर तलाशने में मदद करने की है। वहीं विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहन देना सरकार की वरीयता सूची में है, इसमें विज्ञान के छात्रों के लिये मुफ्त बस की सुविधा का जिक्र इसी सोच को दर्शाता है। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टलों में बीस फीसदी का आरक्षण सामाजिक न्याय की दिशा में कदम कहा जा सकता है। वहीं स्नातक स्तर तक सामान्य तथा कमजोर वर्ग की स्नातकोत्तर स्तरीय छात्राओं की मुफ्त शिक्षा बेटियों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल कही जा सकती है। राज्य की पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी स्थानीय निकायों को भरपूर अनुदान का वायदा बेहतर नागरिक जीवन कीआस जगाता है। अवैध खनन रोकने की दिशा में ड्रोन का इस्तेमाल व ई-नीलामी की व्यवस्था जरूर बदलाव की वाहक बन सकती है।

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