काशी बनेगा आत्मनिर्भर भारत का मॉडल

0-पीएम ने वाराणसी के गैर सरकारी संगठनों के साथ किया संवाद


नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी को देश का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट हब बनाने का वादा किया है। अपने संसदीय क्षेत्र के चुनिंदा गैरसरकारी संगठनों से वीडियो कांफ्रेंसिंग केजरिए संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि काशी देश का सबसे बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में आत्मनिर्भर भारत का मॉडल बनेगा। इस दौरान पीएम ने लोगों से जरूरतमंदों की मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि काशी के लोग मां अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ के दूत बनकर हर जरूरतमंद तक पहुंचें।

पीएम ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से हमारी काशी देश के सबसे बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित हो सकती है। हम काशी को आत्मनिर्भर भारत अभियान के प्रेरक के रूप में विकसित और स्थापित कर सकते हैं। काशी को एक्सपोर्ट हब बनाने केलिए इस समय 8 हजार करोड़ रुपये की अलग-अलग परियोजनाएं चल रही हैं। आत्मनिर्भर योजना के जरिये ज्यादा से ज्यादा कार्यों को बढ़ावा देने की अभी से तैयारी करनी होगी। पर्यटन से जुड़ी योजनाएं जैसे क्रूज, लाइट एंड साउंड, दश्वाश्वमेध घाट सहित अन्य घाटों का सौंदर्यीकरण पर तेजी से काम हो रहा है। इन सबका एक ही लक्ष्य है। काशी को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित कर आत्मनिर्भर भारत का मॉडल बनाना।

भोजपुरी में शुरुआत

पीएम ने अपने भाषण की शुरुआत भोजपुरी से की। उन्होंने कहा- हर-हर महादेव. काशी के पुण्य धरती के आप सब पुण्यात्मा लोगन के प्रणाम हौ। पीएम ने कहा कि काशी को भगवान शंकर का आशीर्वाद है। जब भी मैं काशी केलोगों से संवाद करता हूं तो लगता है कि साक्षात महादेव से बात कर रहा हूं। भगवान शिव की नगरी होने केकारण ही हमारी काशी इस संकट काल में भी उम्मीद और उत्साह से भरी हुई है।

गरीबोंं की चिंता की

पीएम ने इस दौरान काशी केलोगों से जरूरतमंदों की मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने स्तर पर इस संबंध में हर संभव प्रयास किए हैं। जन-धन खाते में हजारों करोड़ रुपये जमा कराना हो या फिर गरीबों, श्रमिकों के रोजगार की चिंता। छोटे उद्योगों को, रेहड़ी-ठेला लगाने वालों को आसान ऋण उपलब्ध कराना हो या खेती, पशुपालन, मछलीपालन और दूसरे कामों के लिए। सरकार ने इसके लिए कई ऐतिहासिक फैसले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत सामान्य जन की पीड़ा को साझा करने की है।

गंदी आदतेंं छोड़ें

पीएम ने इस दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक के साथ थूकने की प्रवृत्ति से मुक्ति का आह्वïान किया। उन्होंने कहा कि हमें रास्तों, सार्वजनिक जगहों पर थूकने की आदत बदलनी पड़ेगी। नई आदतों में दो गज की दूरी, गमछा या फेस मास्क और हाथ धोने की प्रवृत्ति को अपना संस्कार बनाना होगा। उन्होंने कहा कि आपदा कितनी भी बड़ी क्यों न हो, कोई काशी की जीवटता का मुकाबला नहीं कर सकता। यह शहर दुनिया को गति देता है। फिर इसके सामने कोरोना क्या चीज है।

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