कोरोना काल में सादगी की शादियों को राह


क्षमा शर्मा

हाल ही में एक शादी के बारे में पढ़ रही थी, जिसमें वर-वधू पक्ष के दस से कम लोग शामिल हुए। न कोई बैंड, न बाजा, न बारात, न सैकड़ों व्यंजनों की भरमार।

कोरोना काल में शादियों में मेहमानों की संख्या पचास तक सीमित कर दी गई है। हालांकि कई स्थानों पर इसका पालन नहीं भी किया जाता। पिछले दिनों बिहार में एक ऐसी ही शादी हुई थी, जिसमें शामिल बहुत से लोग कोरोना संक्रमित हो गए। दूल्हे की अगले दिन मृत्यु भी हो गई।

अपने यहां शादी के खर्चे से परिवार वाले सहम जाते हैं। लड़कियों को जन्म से पहले दुनिया में न आने की प्रविधियां इसलिए भी दिखाई देती हैं कि न लडक़ी पैदा होगी, न उसकी शादी में दान-दहेज देना पड़ेगा। इन दिनों जब लड़कियां खूब पढ़ती-लिखती हैं, तब भी उनकी शादी में खर्चा कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता ही जाता है।

कहां तो शादी की एक दावत और एक समारोह से काम चल जाता था लेकिन अब रिंग सेरेमनी से लेकर शादी तक कई-कई बड़े कार्यक्रम किए जाते हैं। बहुत से लोग शादी को यादगार बनाने के लिए अनाप-शनाप खर्च करते हैं। पढ़े-लिखे नौजवानों में इन बातों का विरोध दिखाई देता हो, ऐसा भी नहीं है। बात तो यह कही जाती है कि शादी तो जीवन में एक बार ही होती है, इसलिए उसे हर तरह से यादगार बनाया जाना चाहिए। इसे यादगार बनाने के चक्कर में कर्जा लेना पड़े तो भी कोई गम नहीं। मशहूर अभिनेता, अभिनेत्रियां अपनी शादी में कैसे कपड़े पहनते हैं, किस डिजाइनर से डिजाइन करवाते हैं, कौन सा बैंड लाते हैं, किन होटलों में पार्टी होती है, सजावट के फूल कहां से आते हैं, शादी में कौन सा अभिनेता नाचता है, इन सब बातों की नकल करने की कोशिश की जाती है। मीडिया भी इन्हें खूब बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। जब से पेज थ्री कल्चर की शुरुआत हुई है तब से ऐसी बातें छाई रहती हैं।

सादगी अब किसी को लुभाती नहीं है। कई बार तो ऐसा होता है कि लडक़े वाले मांग करते हैं कि शादी के समारोह किन-किन होटलों में होने चाहिए। कपड़े, तथा अन्य सामान कहां से खरीदा जाए। दूसरी तरफ होने वाली वधुएं भी खूब शर्तें लगाती हैं। दिलचस्प यह है कि जो विवाह लडक़े-लडक़ी अपनी पसंद से करते हैं, उनमें भी ये खर्चे कम नहीं होते। वे एक तरह से माता-पिता की रजामंदी के नाम पर अरेंज्ड मैरिज में बदल जाते हैं। जितना दहेज का विरोध हुआ है, दिखावे की आलोचना हुई है, दहेज विरोधी 498-ए जैसा कठोर कानून भी है, मगर ये सब बातें रुकी नहीं हैं। हालांकि हम यह भी जानते हैं कि जिन लोगों की नजरों में आप किसी घटना को यादगार बनाने के चक्कर में रहते हैं, अक्सर उनके लिए इसका कोई महत्व नहीं होता।

एक दुखद पहलू यह है कि जिन शादियों के बारे में कहा जाता है कि वे तो बस एक बार ही होती हैं , वे इन दिनों टूटती भी बहुत जल्दी हैं। हर साल तलाक के मामलों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की ही जा रही है। कई बार तो लोग हनीमून से लौटते ही तलाक की अर्जियां देने लगते हैं। इनमें बहुत से ऐसे होते हैं जो सालों तक किसी सम्बंध में रहने के बाद विवाह का फैसला करते हैं। तब अचानक ऐसा क्या होता है कि सालों तक रिलेशनशिप में थे, खूब खर्च करके विवाह बंधन में बंधे भी, लेकिन शादी टूटने में एक महीना भी नहीं लगा और कहने लगे कि दोनों एक-दूसरे के लिए बने ही नहीं हैं।

पिछले दिनों एक मित्र ने अपनी एक परिचित महिला की कहानी सुनाई। उसने बताया कि उसकी मित्र की लडक़ी ने अपने बचपन के दोस्त से शादी की थी। दोनों अच्छी नौकरियों पर भी थे। इसलिए उन्होंने अपनी सारी बचत शादी पर खर्च कर दी। दोनों के माता-पिता का भी बहुत पैसा खर्च हुआ। विवाह समारोह पांच दिन चले। सबके सब बड़े फाइव स्टार होटल्स में। हनीमून पर वर्ल्ड टूर पर भी गए लेकिन शादी दस महीने भी नहीं चली। दोनों के माता-पिता ने समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कहा कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं। साथ नहीं रह सकते तो नहीं रह सकते। खैर, दोनों अलग हो गए।

लडक़ी अपने माता-पिता के पास रहने आ गई। बाद में दूसरे शहर में जाकर नौकरी करने लगी। इस बीच उसके पिता रिटायर हो गए। छह सालों बाद उसे एक और लडक़ा पसंद आ गया। पहले तो लडक़े के घर वालों ने विरोध किया क्योंकि लडक़ी तलाकशुदा थी। लेकिन बाद में वे मान गए। लेकिन उन्होंने भी चाहा कि शादी खूब धूमधाम से की जाए। लडक़ी ने जब अपने माता-पिता को यह बात बताई तो वे परेशान हो उठे। इतने पैसे अब कहां थे। रिटायर हो चुके थे। बचत का बड़ा हिस्सा लडक़ी की पहली शादी में खर्च हो गया था। जब उन्होंने यह बात लडक़ी को बताई तो वह छूटते ही बोली-क्या आप लोग नहीं चाहते कि मैं खुश रहूं। जब मां ने अपनी मुश्किल बताई, कहा कि अब पैसे नहीं हैं, तो लडक़ी बोली –इतने बड़े फ्लैट में रहने की क्या जरूरत है। छोटा फ्लैट ले लो। बेचकर शादी लायक पैसे मिल जाएंगे। लडक़ी के मुंह से यह बात सुनकर मां दंग रह गई। उसे अफसोस भी हुआ कि बजाय इसके कि लडक़ी सादगी से शादी के लिए लडक़े को मनाती और वह अपने घर वालों को, वह एक तरह से माता-पिता को सता रही थी। उसकी मां ने अपनी मित्र से कहा कि लोग सोचते हैं कि दूसरी शादी करना बहुत आसान है लेकिन वे ही इस बात को जानते हैं, जिन्हें यह सब भुगतना पड़ता है।

इस उदाहरण से घर वालों की त्रासदी को समझा जा सकता है। स्टेटस के नाम पर दिखावा हमारे जीवन का इतना बड़ा अंग हो गया है कि अच्छा-बुरा कुछ नहीं सूझता। आजकल जैसी शादियां हो रही हैं, चाहे कोरोना की मजबूरी के कारण ही, उन्हें हमेशा के लिए क्यों नहीं अपनाया जा सकता। जितना खाना बनता है, उससे ज्यादा बिगड़ता है। इस पैसे से न जाने कितने जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है।

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