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कोरोना काल में राममंदिर का शिलान्यास

योगेश कुमार सोनी


राम मंदिर को लेकर दुनिया भर के लोगों का इंतजार अगले चंद दिनों में खत्म होने जा रहा है। आनेवाले 05 अगस्त को अयोध्या में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे यह पल देखने के लिए करोड़ों लोग बेहद उत्सुक हैं लेकिन कोरोना काल के चलते इस मौके पर केवल दो सौ लोगों की ही उपस्थिति रहेगी। जैसा कि अभी कोरोना के चलते अधिक लोग एकत्रित होने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है तो शासन-प्रशासन हर तरह का एहतियात बरत रहा है। यदि ऐसे में और अधिक वीआईपी लोगों की सूची तैयार की जाए तो एक हजार से ज्यादा लोग हो सकते हैं लेकिन ऐसा न करके फिलहाल मात्र 200 लोगों के ही नाम की सूची बनाई गई है। इस सूची में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी, कल्याण सिंह, जयभान सिंह पवैया के अलावा श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य शामिल होंगे। कार्यक्रम की अगुवाई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे और प्रदेश के दोनों उप-मुख्यमंत्रियों के आने की संभावना है। गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति पर संशय है।

इस पल को देखने के लिए के हमारे देश के अलावा कई देशों के दिग्गज व आम श्रद्धालु बेहद उत्सुक हैं लेकिन दुनिया को अपनी जद में कैद करने वाले कोरोना वायरस के सामने सब लाचार हो गए। दरअसल हर किसी का यह वो सपना पूरा होने जा रहा है जिसका लगभग पांच सौ वर्षों से इंतजार था। जैसा कि अयोध्या का विवाद पांच शताब्दी पुराना है लेकिन पहली बार यह मामला कोर्ट में 1885 में पहुंचा था। इसके बाद दोनों ओर से हिंदू-मुस्लिम पक्षकार आते गए और मामला कानूनी दाव-पेंच में फंसता ही चला गया। पूर्व में भी कोर्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से इस बात को कहा कि इसका फैसला कोर्ट के बाहर आपसी समझौते से कर लो जिसको पिछले कुछ समय पहले भी अदालत ने फिर इस बात को प्रत्यक्ष रूप से कहा लेकिन दोनों ओर से कोई नहीं माना।समय बीतता जा रहा था लेकिन इंतजार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। अब तो स्थिति यह हो गई थी कि हर कोई यही चाह रहा था कि जो फैसला आना है अब वो आ जाए। और बीते दिनों कोर्ट ने हर पहलू की गंभीरता को समझते हुए अपना निर्णय बता दिया और देश के एक-एक नागरिक ने कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का दिल से स्वागत किया।यहां तारीफ करनी होगी देश की जनता की जो किसी भी नेता के भडक़ाऊ भाषण का शिकार नहीं हुई। एकबार को सभी ने यह उम्मीद छोड़ दी थी कि इस मामले का कोई हल भी निकल सकता था। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में लोगों को यह लगा था कि सरकार आते ही अध्यादेश लाकर मंदिर बन जाएगा लेकिन सरकार ने न्यायपालिका पर भरोसा रखा, चूंकि न्याय के मंदिर से हमेशा न्याय ही मिलता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि मामला संवेदनशील होने के कारण जजों को कठिन मंथन का सामना करना पड़ा था और हर पहलू को समझते हुए उत्तर देना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता था। स्वभाविक था कि जिस मामले पर देश ही नहीं दुनिया की नजरें टिकी हों तो मामले के किसी भी बिन्दु को अनदेखा करना पेचीदा हो सकता था लेकिन कहते हैं कि जब जो काम जिस समय और जिस माध्यम से होना होता है तभी होता है। राममंदिर के शिलान्यास को लेकर दुनियाभर में लोग इस तरह उत्साहित हैं मानो कोई बहुत बड़ा पर्व हो। सोशल मीडिया पर हर कोई बेहद खुशी का इजहार करते हुए अपने अंदाज में बधाई दे रहा है। लोग अपने घर में दीये जलाएंगे व तमाम संस्थाएं दीए, तेल व मोमबत्ती वितरण कर रही हैं। एकबार फिर ऐसा समय आएगा कि शिलान्यास के समय हर किसी की नजर टीवी पर होगी। मंदिर निर्माण के लिए देश के सभी तीर्थस्थलों से मिट्टी भेजी जा रही है। देवभूमि उत्तराखंड के मंदिरों से भी मिट्टी और गंगाजल अयोध्या भेजा गया है। बदरीनाथ धाम व चतुर्थ केदार रुद्रनाथ जैसे अन्य कई धामों की मिट्टी और वैतरणी कुंड का जल भी भेजा गया है। हर किसी का मानना है कि यह मंदिर मात्र मंदिर ही नहीं यह उन रामभक्तों की तपस्या भी है जिन्होनें इसके लिए संघर्ष किया है जो लोग इस मंदिर को बनता नहीं देख पाए लेकिन अब उनकी आत्मा प्रसन्न होगी। बीते दिनों राममंदिर की नींव की खुदाई के दौरान जब अवशेष मिले थे तो इस बात की प्रमाणिकता मिली थी कि राममंदिर यहीं था तो देशवासियों के चेहरे पर एक अलग ही तरह की खुशी देखते बन रही थी। आज हर भारतीय के लिए रामनाम की इस आस्था से विश्व भी चकित व प्रभावित है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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