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कोरोना काल का मजा और सज़ा

आलोक पुराणिक


एक कूलर कंपनी ने अपने कारोबार को लेकर नोट लिखा—कोरोना महामारी में एयरकंडीशनरों से भी खतरा बताया जा रहा है। इसलिए लोग कूलरों को ही ज्यादा खरीदेंगे, तो हमारी बिक्री ज्यादा होगी। कुल मिलाकर आशय यह है कि हम कूलर वाले मजे में हैं। कूलर वाले मजे में हैं, हैंड सेनेटाइजर वाले मजे में हैं, मास्क वाले मजे में हैं।

सिनेमाहॉल वाले दुखी हैं। सिनेमाहॉल वगैरह, पर खुलने से क्या होता है, खौफजदा पब्लिक आये भी तो। सिनेमाहॉल है, कोई शराब की दुकान थोड़े ही है, हिम्मती शराबी डर भुलाकर, कूदकर लाइन में आ जाये। कस्टमर हो तो शराबी जैसा, पर शराबी जैसा कस्टमर हर धंधे को थोड़े ही मिलता है। धन्यभागी हैं साहसी शराबी जो ऐसे माहौल में भी लाइन लगाये खड़े रहते हैं, और परम धनभागी वे दुकानदार, जो कोरोनाजनित मंदी से मुक्त हैं।

कुछ मजे में हैं, कुछ कष्ट में हैं। कोरोना ने बहुतों को मारा, बहुतों को उबारा है। लाभ-हानि, जीवन-मरण, यश-अपय़श कोरोना हाथ, कुछ यशस्वी हो लिये हैं, कोरोना में, कुछ के खाते अपयश लगा है, कोरोना में।

कई कवि रोज फेसबुक लाइव पर आते हैं। रोज क्या दिन में तीन-चार बार आते हैं। आते ही जाते हैं। परम यशस्वी हुए जा रहे हैं। एक जुआरी जो नान-कोरोना काल में सिर्फ जुआ खेलता था, अब भी कोरोना काल में सिर्फ जुआ खेलता है। पहले उसे दुनिया जहां की लानत मिलती है, अब स्वघोषित कोरोना वॉरियर हो गया है। तर्क बहुत साफ है कि ऐसे वक्त जब शराब की दुकान पर खड़ा होकर, सोशल डिस्टेंसिंग खत्म करके दूसरों के लिए खतरा बन सकता था, पर वह घर पर बैठकर सिर्फ जुआ खेल रहा है, देश-समाज को कोरोना से बचा रहा है, सो वह कोरोना योद्धा है।

एक विकट शराबी भी खुद को कोरोना के खिलाफ योद्धा मानता है। इस भाई का कहना है कि वह मरा तो शराब की वजह से मरेगा, कोरोना को मौका न देगा कि कोरोना उसे मार दे। मरने के मामले में शराबी आम तौर पर आत्मनिर्भर होते हैं, खुद ही मर जाते हैं, कोरोना को मौका जो न दे, वह तो कोरोना वॉरियर हुआ न, सो साहब दारूबाज भी इन दिनों कोरोना वॉरियर हैं। सब हैं जी कोरोना वॉरियर।

है जी बिलकुल है जी। हर बंदा योद्धा है। युद्ध स्तर की तैयारियां किये बैठे हैं भाई लोग।

एक कवि मित्र सुबह दोहा सुनाते हैं, दोपहर में गज़़ल कहते हैं, शाम को मुक्त छंद कविता कहते हैं, ये कोरोना वॉरियर हैं। एक तरह से ये लोगों की इम्युनिटी मजबूत कर रहे हैं। इतनी कविताएं, छंद, दोहे जो रोज झेल ले, वह कुछ भी झेल लेने की क्षमता, इम्युनिटी विकसित कर सकता है। कोरोना का वायरस चूंकि चाइनीज है, इसलिए चाइनीज ही समझता होगा, अगर कहीं इधर की साइड के कवियों के पल्ले पड़ जाता, तो वैसे ही टें बोल जाता।



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