केन्द्र का किसान-कानून, किसान विरोधी : बघेल

0-लॉकडाउन ने मजदूरों व किसानों की तोड़ी कमर

0-विकास के मामले में कोसों दूर बिहार


पटना । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज रविवार को पटना में आयोजित एक पत्रकारवार्ता में कहा कि देश के प्रधानमंत्री लोगों को झटका देने में माहिर है। पहले कालाधन का झटका, फिर जीएसटी उसके बाद अचानक लॉकडाउन का झटका, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित किसान व मजदूर वर्ग हुआ है। उन्होंने कहा कि बिहार में 15 वर्ष के सुशासन बाबू के राज में किसानों व मजदूरों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। बिहार का इतिहास अत्यंत पौराणिक एवं ऐतिहासिक रहा है। किंतु आज भी बिहार विकास के मामले में पिछड़े पायदान पर खड़ा है। श्री बघेल ने कहा कि राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ में चुनाव के पूर्व जो वादा किसानों, मजदूरों के साथ किया था सरकार बनने के तत्काल बाद ही किसानों के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों के फसल पर बोनस व समर्थन मुल्य पर धान एवं अन्य फसलों की खरीदी सरकार ने की है। सबसे दुखद पहलु तब सामने आया जब प्रधानमंत्री ने आनन-फानन में अचानक लॉकडाउन की घोषणा कर दी। तब लाखों की संख्या में प्रवासी गरीब मजदूर अपने घरों के लिए पलायन करने लगे जिसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों से मजदूर छत्तीसगढ़ होकर अपने घरों को जाने के लिए निकल पड़े। तब छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके खाने-पीने, पैरों में जूते चप्पल, की व्यवस्था के साथ ही उनके राज्यों की सीमा तक छोडऩे के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई। केन्द्र सरकार ने कृषि को लेकर जो कानून बनाया है उस कानून से किसानों की फसल का वाजिब मुल्य मिलना मुश्किल हो जाएगा तथा केन्द्र का यह कानून किसान विरोधी कानून है। इसमें सारी व्यवस्था पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है। जिससे किसान बर्बाद हो जाएंगे। कांग्रेस की सरकार शुरु से ही इन कृषि कानूनों का विरोध करती है तथा इसका विरोध करने के लिए राहुल गांधी को सड़कों पर उतरना पड़ा। श्री बघेल ने कहा कि मैं कुछ दिन पूर्व नागपुर गया था वहां पर एक बड़े उद्योगपति के द्वारा एक लाख टन स्टॉक का गोदान बनाया गया है। जिसमें बड़ी मात्रा में कृषि उपज रखा जा सकता है। जिसका मतलब है, कि कुछ बड़े पूंजीपती किसानों की फसलों का दाम अपने हिसाब से तय करेंगे। श्री बघेल ने कहा कि बिहार में लंबे समय से सुशासन बाबू की सरकार होने के बाद भी आज इस प्रदेश के लाखों मजदूर दूसरें प्रदेशों में कार्य करने जाते है। बिहार में 70 प्रतिशत से अधिक लोग अभी भी कृषि पर ही निर्भर है।

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