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कूटनीतिक सम्मोहन की गिरफ्त में नेपाली नेतृत्व


अरुण नैथानी

भारतीय कूटनीति के इतिहास में अनेक ऐसी सर्वगुण संपन्न स्त्रियों का जिक्र है, जिन्हें राजा-महाराजा शत्रु देशों के भेद जानने और अपने शत्रुओं पर विजय के लिये उपयोग करते थे। सोलह कलाओं में निपुण ये स्त्रियां अपने रूप-लावण्य और कुशाग्र बुद्धि से अपने लक्ष्यों को भेदती थीं। कालांतर इसी शृंखला में विष कन्याओं का भी उपयोग प्रतिद्वन्द्वी राजाओं व उत्तराधिकारियों को ठिकाने लगाने के लिये किया जाता रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध में भी ऐसे कई उदाहरण सामने आते हैं। हाल के दिनों में पड़ोसी देश नेपाल में चीनी राजदूत होऊ यांगी की बढ़ती दखल ने उन पुराने प्रसंगों को याद दिला दी। उसके कार्यकाल में भारत नेपाल से जितना दूर हुआ है, उसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती।

चीन में कई कूटनीतिक जिम्मेदारियां निभाने के बाद चीनी नागरिक होऊ यांगी को पाकिस्तान का राजदूत बनाकर भेजा गया था। वे दक्षिण एशिया के मामलों की खासी जानकार मानी जाती हैं। यांगी की कूटनीतिक कुशाग्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एकदम अलग संस्कृति वाले देश पाकिस्तान में वह पूरी तरह घुल-मिल गई। उसने पाक में रहते हुए उर्दू सीखी और कूटनीतिक आयोजनों पर पाक नेताओं के साथ धाराप्रभाव उर्दू में बात करती रही। पाक में रहते हुए उसने उन कई पाकिस्तानी नीतियों पर काम किया, जिनका संबंध भारत से था। यही वजह है कि जटिल परिस्थितियों वाले देश में वह तीन साल निर्बाध रूप से काम करती रही। जब चीन को लगा कि भारत-नेपाल के रिश्तों में खटास आ रही है तो उसे पाक से हटाकर नेपाल भेज दिया गया।

होऊ यांगी को वर्ष 2018 में नेपाल का राजदूत बनाकर भेजा गया। कूटनीति के समझ रखने वाले जानते हैं कि यांगी के बेहद करीबी के.पी. शर्मा ओली ने जब 2018 में चुनाव लड़ा तो भारत विरोधी तेवर तभी से सुनाई देने लगे थे। उन्होंने भारत पर खुलेआम नेपाल की राजनीति में दखल देने के आरोप लगाये थे। इसके बाद चीनी राजदूत ने आर्थिक सहायता तथा दूसरी मदद से नेपाल पर डोरे डालने शुरू किये। इन दो सालों में यांगी की कामयाबी इस हद तक जा पहुंची कि सदियों से बड़े-छोटे भाई के रिश्ते वाले भारत-नेपाल दूर होते चले गये।

दरअसल, यांगी ने हिमालय की गोद में बसे नेपाल के लोगों का दिल जीतने के लिये बहुत ही सौम्य कूटनीति अपनायी। उसकी कार्यशैली अन्य चीनी कूटनीतिज्ञों से बिल्कुल भिन्न रही है। आमतौर पर धारणा है कि चीनी राजनयिक चीन का बचाव करने के लिये बेहद आक्रामक और रूखा व्यवहार करते हैं। जिसे पश्चिमी कूटनीतिज्ञ ‘वॉल्फ वॉरियर्स’ की संज्ञा देते हैं। लेकिन यांगी ने सोशल और परंपरागत मीडिया का भरपूर इस्तेमाल नेपाली लोगों के करीब आने के लिये किया। एक बार उसने ट्वीट किया ‘हम लोग पड़ोसी हैं, जो पहाड़ों-नदियों से जुड़े हैं। हमारी दोस्ती अमर रहे।’ वह कभी नेपालियों को उनके नये साल की बधाई देती तो कभी फिल्मों के टिकट तक बांटती। कभी कोरोना वायरस फैलाने के चीन पर लगे आरोपों का बचाव करती। उसने नेपाल के लोगों को बढ़-चढक़र बताया कि चीन नेपाल के लिये क्या-क्या कर रहा है। आमतौर पर चीनी लोग ट्विटर से दूर रहते हैं मगर यांगी हर घटना के लिये नेपाली भाषा में ट्वीट करती है। उसके हजारों फालोअर हैं।

नेपाल की राजनीति में बड़ा मोड़ तब आया जब ओली ने अपनी कुर्सी बचाने के लिये उग्र राष्ट्रवाद का सहारा लिया और आरोप लगाया कि भारत ने नेपाल की जमीन पर अधिकार किया है। ऐसे हालात में यांगी ने नेपाल को चीन के खेमे में खींचने में भरपूर कामयाबी हासिल की। यहां तक कि यांगी के कार्यकाल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अक्तूबर, 2019 में दो दिवसीय यात्रा पर नेपाल पहुंचे। उस दौरान चीन व नेपाल के बीच 20 सूत्रीय समझौता हुआ, जिसमें नेपाल को रेलमार्ग से चीन से जोडऩा भी शामिल था, जिससे आयात-निर्यात के लिये नेपाल की भारत पर निर्भरता कम की जा सके।

हाल के सीमा विवाद पर भारत द्वारा बात न करने की स्थिति को यांगी ने एक अवसर के रूप में भुनाया। उसने न केवल बिखराव के मोड़ पर खड़ी सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को टूटने से बचाया बल्कि ओली की कुर्सी भी सुरक्षित की। वह नेपाली राजनीति में गहरे तक उतर गई और कई चीजों को तय करने में भूमिका निभाने लगी। यहां तक कि ओली की कुर्सी बचाने के लिये उसने नेपाल के राष्ट्रपति वीडी भंडारी व ओली के धुर विरोधी माधव कुमार नेपाल तक से मुलाकात की। यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री झाला नाथ खनाल से भी मिली। उसके बाद सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की वह अहम बैठक रद्द हो गई, जिसमें ओली से इस्तीफा मांगा जाना था व पार्टी टूट के कगार पर थी।

कहा जाता है कि नेपाल का विवादित नक्शा बनाने में यांगी की भूमिका रही है। पार्टी का वह प्रतिनिधिमंडल जो राजनीतिक मानचित्र बदलने के लिये संविधान संशोधन विधेयक का मसौदा तैयार करने में सहायता कर रहा था, वह लगातार चीनी राजदूत के संपर्क में था। यांगी का ओली के दफ्तर और घर लगातार आना-जाना लगा रहता है। हालांकि, अब चीनी राजदूत के नेपाल की अंदरूनी राजनीति में अनावश्यक हस्तक्षेप के विरोध में सडक़ों पर प्रदर्शन भी होने लगे हैं।

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