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कांग्रेस की दशा-दिशा



तेइस वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के पार्टी संगठन में बदलाव की मांग को लेकर लिखे पत्र के लीक होने के बाद कांग्रेस में जो सतही घमासान दिखायी दे रहा है, वह भले ही वास्तविक हो या रणनीति का हिस्सा, उससे पार्टी का भला ही होने जा रहा है। वर्ष 2018 में तीन राज्यों में शानदार जीत के बावजूद पार्टी को इतनी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर नहीं मिल पायी थी, जितनी इस विवाद से मिली। पिछले कुछ दिनों में पार्टी में एकता और सोनिया गांधी से स्थायी नेतृत्व संभालने को लेकर जो मुहिम जारी रही, उसके निहितार्थ इससे कुछ अलग नहीं हैं। सोमवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मैराथन बैठक में सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष पद संभाले रखने और अगले छह माह में नये अध्यक्ष के चुनाव के लिये एआईसीसी की बैठक बुलाने का निर्णय किया गया।?सोमवार को कांग्रेस की वर्किंग कमेटी के बीच विरोध करने वाले नेताओं की भाजपा से सांठगांठ पर राहुल गांधी के कथित बयान के उल्लेख और उस पर वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया को शाम होते-होते मीडिया की उपज करार दे दिया गया। फिर इन नेताओं के भी पार्टी नेतृत्व के समर्थन वाले बयान सामने आने लगे। विरोध करने वाले नेताओं ने अपने ट्वीट वापस ले लिये। दरअसल, कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक पार्टी के 23 दिग्गज नेताओं के सोनिया गांधी को लिखे पत्र के लीक होने के बाद के हालात पर विचार-विमर्श करने के बाबत आहूत की गई थी। इस पत्र पर गुलाम नबी आजाद, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, शशि थरूर, कपिल सिब्बल, पृथ्वीराज चव्हाण, आनन्द शर्मा जैसे दिग्गजों के हस्ताक्षर बताये जाते हैं, जो पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान रहे हैं। गांधी परिवार के प्रति निष्ठावान रहे इन नेताओं के पत्र को लेकर कयास लगाये जाते रहे हैं कि क्या वाकई ये पार्टी की साख में आ रही गिरावट को देखते हुए बदलाव के मकसद से लिखा गया या फिर नेतृत्व परिवर्तन के लिये गांधी परिवार के अनुकूल वातावरण तैयार करने को लेकर लिखा गया।

बहरहाल, हालिया विवाद ने कई सवालों को जन्म दिया है। क्या वाकई पार्टी में नेतृत्व के मुद्दे पर मतभेद हैं? क्या पार्टी में सामूहिक नेतृत्व की संभावना है? क्या फिलहाल कांग्रेस में गांधी परिवार के बिना नेतृत्व की संभावना है? क्या वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति के मद्देनजर राहुल गांधी द्वारा बदलाव के लिये दिये गये इस्तीफे की मंशा को पूरा किया जा रहा है? क्या मौजूदा मुहिम राहुल गांधी की ताजपोशी के लिये आधारभूमि तैयार कर रही है? सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी से अगले निर्णय तक अध्यक्ष पद पर बने रहने का आग्रह किया गया जिसे उन्होंने स्वीकार भी किया। दरअसल, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद ऐसी ही मुहिम चला रहे थे। सांसदों ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की थी। साथ ही आग्रह किया था कि जब तक राहुल गांधी अध्यक्ष पद नहीं संभालते तब तक वे अध्यक्ष बनी रहें। साथ ही यह भी आरोप लगाया जाता रहा है कि जो लोग नेतृत्व परिवर्तन की बात कर रहे हैं, वे भाजपा के हाथों में खेल रहे हैं और पार्टी को कमजोर कर रहे हैं। इस मुहिम से जािहर था कि पार्टी के नेता व कार्यकर्ता गांधी परिवार के नेतृत्व को ही मजबूत करने की बात कर रहे थे। वह भी ऐसे समय में जब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी के कार्यकाल को एक वर्ष?पूरा हो चुका है। कयास लगाये जा रहे हैं कि यह समय राहुल गांधी को अपनी टीम तैयार करने के लिये दिया जा रहा है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की सोच है कि पार्टी की एकता गांधी परिवार के हाथों ही संभव है। इसके बावजूद पार्टी में अनुभवी व बड़े कद के नेताओं की कमी नहीं है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि जब कोई पार्टी मुश्किल वक्त से गुजर रही हो तो पार्टी में अंतर्विरोध के स्वर स्वाभाविक हैं।


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