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कम करें तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का खतरा फिलहाल टल गया लगता है। बुधवार को इराक में दो अमेरिकी सैनिक अड्डों पर ईरान द्वारा मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयान से ऐसा लगा कि वह फिलहाल आग को और भडक़ाने के मूड में नहीं हैं। ट्रंप ने ईरान के साथ शांति की पेशकश करते हुए कहा कि ईरान के हमले का जवाब देने के लिए वे दूसरे विकल्प देख रहे हैं। इसकी व्याख्या उन्होंने आर्थिक प्रतिबंध लगाकर ईरान को दंडित करने के रूप में की। उन्होंने कहा कि अमेरिका उन सबके साथ शांति के लिए तैयार है, जो शांति चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को एटम बम वह नहीं बनाने देंगे।

इस पर ईरान ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जिसका अर्थ यह बन रहा है कि वह भी संयम से काम लेना चाहता है। ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन तेहरान ने बदले में जिस तरह की कार्रवाई की, उससे लगा कि अभी उसका ध्यान अमेरिका को उकसाने से ज्यादा अपने नागरिकों का गु्स्सा शांत करने पर है। कहा जा रहा है कि ईरान ने जान-बूझकर ऐसी जगह को निशाना बनाया, जहां किसी अमेरिकी की जान नहीं जाने वाली थी। उसका मकसद नुकसान पहुंचाना कम, चेतावनी देना ज्यादा लगा।

इराक ने आधिकारिक रूप से बताया है कि ईरान की ओर से उसे इस हमले की जानकारी दे दी गई थी। संभवत: इराक ने इसे अमेरिकी अधिकारियों तक पहुंचा दिया और वॉशिंगटन ने नुकसान से बचने के लिए एहतियाती कदम उठा लिए। दूसरी तरफ ईरान की ही तरह ट्रंप भी बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। शायद इसलिए कि जनरल कासिम सुलेमानी को मारने को लेकर उनके फैसले को अपने देश में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। अमेरिका के मित्र राष्ट्र भी इस मसले पर उसके साथ नहीं खड़े थे। इजरायल तक ने मुंह मोड़ लिया था। कुछ अमेरिकी सीनेटरों ने ईरान में कार्रवाई का विरोध करते हुए पूछा कि ट्रंप ने बिना कांग्रेस को सूचना दिए ऐसा कदम क्यों उठाया?

अमेरिकी कांग्रेस में राष्ट्रपति के युद्ध संबंधी अधिकारों की कटौती पर प्रस्ताव आ चुका है और जल्द ही इस पर वोटिंग होने वाली है। लेकिन चुनावी साल में ट्रंप को अमेरिकी जनता के सामने खुद को लगातार आक्रामक भी दिखाना है, इसलिए वे ईरान को दूसरे तरीकों से सबक सिखाने या प्रतिबंध और बढ़ाने की बात कर रहे हैं। जो भी हो, एक बात तो तय है कि इस कठिन मोड़ पर दोनों राष्ट्र प्रमुखों ने समझदारी का परिचय दिया है। दोनों को पता है कि उनकी टकराहट दुनिया के लिए बहुत भारी पडऩे वाली है। स्लोडाउन और अनेक संकटों से जूझ रही विश्व अर्थव्यवस्था के लिए यह काफी घातक सिद्ध होगा। अमेरिका और ईरान, दोनों के करीबी मुल्कों और पूरी विश्व बिरादरी को उनके बीच का तनाव घटाने की कोशिश करनी चाहिए।

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