कमलनाथ ने प्रदेश सरकार से मूंग फसल की खरीदी और बोनस को लेकर साधा सवाल


भोपाल, (आरएनएस)। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रदेश सरकार से मूंग फसल की खरीदी और बोनस को लेकर सवाल पूछा है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश में ग्रीष्मकालीन फसल मूंग की बुवाई का समय आ गया है, लेकिन अब तक सरकार ने मूंग की फसल के लिए बुवाई से लेकर खरीदी तक की कोई नीति सार्वजनिक नहीं की है। जिस तरह के हालात बन रहे हैं, बहुत संभव है कि मूंग के किसानों को प्रदेश सरकार की लापरवाही से पिछले साल से भी बुरी स्थितियों का सामना करना पड़े। कमलनाथ ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि प्रदेश सरकार को अब तक केंद्र सरकार को अपना मूंग खरीद प्रस्ताव भेज देना चाहिए था, ताकि अभी से यह स्पष्ट हो जाता कि प्रदेश सरकार किसानों से कितनी मूंग खरीदेगी और सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऊपर बोनस देगी या नहीं? उन्होंने कहा कि पिछले साल देखने में आया था कि किसानों के पास मूंग की फसल बची रह गई थी और राज्य सरकार ने मूंग खरीद का टारगेट पूरा होने की घोषणा कर दी थी। बाद में जब कांग्रेस पार्टी ने बड़े पैमाने पर किसानों की समस्या को उजागर किया, तब सरकार ने मूंग की खरीदी की थी, लेकिन उस बीच हजारों किसान औने पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हो चुके थे। यही नहीं, मूंग खरीद के लिए राशि की व्यवस्था न होने के कारण सरकार ने बच्चों के मध्यान भोजन के पैसे को मूंग खरीद में खर्च किया था जिसके समाचार आये थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से पांच बिंदुओं पर सवाल करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन सवालों के जवाब देने के साथ ही मुख्यमंत्री को वर्तमान में मूंग के किसानों की स्थिति और परिदृश्य अवगत कराना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ग्रीष्म कालीन फसलों/जायद फसलें 6.50 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर ली जाती है जिसमें से 5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र पर मूंग की फसल ली जाती है । प्रदेश के 3.50 लाख से 4 लाख किसान परिवार ग्रीष्म कालीन फसलें लेते है।


मध्यप्रदेश के 30 जिलों में किसानों द्वारा मूंग की फसल ली जाती है जिसमें हरदा, होशंगाबाद, जबलपुर, ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी प्रमुख जिलें है।


उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की पूर्व तैयारी नहीं होने से गत वर्ष समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अपेक्षित स्वीकृति प्राप्त नही हुई थी जिस कारण से किसानों से मूंग खरीदी में समस्यायें हुई थी। सरकार को मूंग के किसानों को राशि भुगतान करने के लिये प्रदेश के नौनिहालों के मध्यान्ह भोजन की राशि का उपयोग करना पड़ा था ऐसे समाचार आये थे। कमलनाथ ने कहा कि प्रति वर्ष मध्यप्रदेश सरकार स्पेशल समर प्रोजेक्ट के तहत मूंग के लिये विशेष परियोजना बनाकर भारत सरकार को भेजती है परन्तु इस वर्ष संभवत: यह परियोजना नहीं भेजी गई है। उन्होंने याद दिलाया कि गत वर्ष भारत सरकार ने मूंग और मटर के विदेशों से आयात की अनुमति देकर देश एवं प्रदेश के किसानों की अनदेखी की थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इन सारी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर प्रदेश के किसानों के हित में तत्काल कार्यवाही करें।

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