कमलनाथ नई शक्ति और ऊर्जा के साथ राजनीतिक मैदान में आए

भोपाल (आरएनएस)। मध्यप्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ नई शक्ति और ऊर्जा के साथ राजनीतिक मैदान मेें आ गए हैं। कांग्रेस ने एकमत से उन्हें 2023 के लिए सीएम इन वेटिंग घोषित कर दिया है। इससे उत्साहित होकर कमलनाथ ने सुपर पावर कमेटी बनाई है जिसे राजनीतिक समिति का नाम दिया गया है। इस समिति में 20 सदस्य बनाए गए हैं जबकि दो स्थाई आमंत्रित हैं। यह समिति राजनीति से संबंधित सभी फैसले लेगी। इस समिति की बैठक 15 दिन के अंतराल बाद भोपाल में होगी। कमलनाथ ने यह भी स्पष्ट संकेत दिया कि कांग्रेस एक एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और मिशन 2023 पर फोकस करेगी। कमलनाथ ने अपनी सुपर पावर कमेटी में सभी असंतुष्टों को स्थान दिया है। खास तौर पर उनकी आजकल अजय सिंह और अरुण यादव से बन रही है। इस समिति में दिग्विजय सिंह के समर्थकों को भी पर्याप्त महत्व दिया गया है। अरुण यादव और कमलनाथ की जुगलबंदी की इन दिनों पीसीसी में चर्चा है। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा की सीट के लिए लॉबिंग कर रहे अरुण यादव और अजय सिंह ने आजकल कमलनाथ से अपने सभी मतभेद पीछे रख दिए हैं और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर राजनीति कर रहे हैं। राज्यसभा के तीन सदस्य एमजे अकबर संपतिया उईके (दोनों भाजपा) और कांग्रेस के विवेक तन्खा जून में रिटायर्ड हो रहे हैं। विवेक तन्खा क्योंकि कांग्रेस के इकलौते कश्मीरी पंडित सांसद हैं इसलिए उन्हें फिर से राज्यसभा में भेजे जाने की अटकलें हैं, लेकिन यदि मामला प्रदेश कांग्रेस कमेटी के ऊपर छोड़ा गया तो कलनाथ की पसंद से अगला राज्यसभा सदस्य चुना जाएगा। कमलनाथ की हैसियत और उनकी ताकत को देखते हुए अरुण यादव और अजय सिंह ने फिलहाल उनसे अपने सभी मतभेद समाप्त कर दिए हैं। कमलनाथ भी चतुराई से इन दोनों नेताओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनकी रणनीति यह है कि अरुण यादव या अजय सिंह को आगे करके दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह को काउंटर किया जाए। सूत्रों के अनुसार कमलनाथ आने वाले लोकसभा चुनाव तक अब अपना अधिकांश समय मध्यप्रदेश को ही देंगे। दिल्ली की राजनीति मेंउनका दखल कम होगा। समिति में दिग्विजय सिंह को पर्याप्त महत्व दिया गया है। उनके समर्थक डॉ. गोविंद सिंह, अशोक सिंह, राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल को भी समिति में लिया गया है। 2018 के चुनाव में दिग्विजय सिंह कमलनाथ के प्रमुख चाणक्य थे। उस समय कमलनाथ को मध्यप्रदेश की राजनीति की जमीनी हकीकत पता ही नहीं थी क्योंकि उन्होंने मध्यप्रदेश में इतना समय राजनीति में कभी नहीं दिया था लेकिन पिछले चार वर्षों से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश की राजनीति को अच्छी तरह से समझ लिया है। उसके बावजूद दिग्विजय सिंह का मध्यप्रदेश की राजनीति में क्या महत्व है इसको कमलनाथ भली-भांति जानते हैं। दिग्विजय सिंह प्रदेश कांग्रेस के ऐसे नेता हैं जो प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के भूगोल और इतिहास को जानते हैं। मध्य प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के ऐसे कम से कम 50 नेता और कार्यकर्त हैं जिन्हें दिग्विजय सिंह नाम से जानते हैं। दिग्विजय सिंह ने पूरी ताकत से कमलनाथ का समर्थन किया है और उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा बताया है ऐसे में कोई कारण नहीं था कि कमलनाथ दिग्विजय सिंह की उपेक्षा करें। जाहिर है उन्होंने दिग्विजय सिंह के समर्थकों को भी एडजस्ट किया है। कमेटी में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, सुरेश पचौरी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव डॉ. गोविंद सिंह, आरिफ अकील, सज्जन सिंह वर्मा, विजयलक्ष्मी साधौ, एनपी प्रजापति, बाला बच्चन, रामनिवास रावत, ओमार मरकाम, जीतू पटवारी, लखन घनघोरिया, चंद्र प्रभाष शेखर, प्रकाश जैन, अशोक सिंह, राजीव सिंह के अलावा विशेष रूप से स्थायी आमंत्रित सदस्य राजमणि पटेल और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा को शामिल किया गया है। कमेटी के अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ होंगूे। प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता केके मिश्रा का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर इस कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े राजनीतिक मामलों को लेकर निर्णय लेगी।

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