• dainik kshitij kiran

एच-1बी वीजा प्रणाली सुधारेंगे, ग्रीन कार्ड में कोटा करेंगे खत्म

0-जो बाइडेन का वादा


वाशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने वादा किया है कि यदि वह चुनाव जीते तो एच-1बी वीजा प्रणाली में सुधार करेंगे। प्रचार अभियान के दौरान ग्रीन कार्ड के लिए देशों के कोटा को भी समाप्त करने की बात कही गई है। माना जा रहा है कि बाइडेन ने प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकी समुदाय को लुभाने के लिए ये वादे किए हैं। एच-1बी वीजा गैर-आव्रजक वीजा है। इसके जरिये अमेरिकी कंपनियां विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों की नियुक्ति कर सकती हैं।

भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को भारतीय-अमेरिकियों पर जारी एक नीति दस्तावेज में बाइडेन के प्रचार अभियान में परिवार आधारित आव्रजन प्रणाली को समर्थन देने और धार्मिक कार्य वीजा की प्रक्रिया को सुसंगत बनाने का भी वादा किया गया है।

अहम साझीदार बनेगा भारत

अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन की प्रचार मुहिम के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि बाइडेन प्रशासन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भारत की अग्रणी भूमिका की वकालत करेगा। पूर्व राजनयिक एवं बाइडेन के शीर्ष विदेश नीति सलाहकार टोनी ब्लिंकेन ने एक पैनल चर्चा में कहा कि यदि बाइडेन चुनाव जीत जाते हैं, तो वह भारत को सुरक्षा परिषद में सीट दिलाने में मदद करेंगे और भारत एवं अमेरिका के रक्षा संबंधों को मजबूत करेंगे।

0 views0 comments

Recent Posts

See All

डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद किए

वॉशिंगटन, । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनियों के फेसबुक और ट्विटर द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के बाद हमेशा के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट को बंद कर दिया है। उ

डब्ल्यूएचओ ने कहा, भारत में मिला कप्पा नहीं, सिर्फ डेल्टा वैरिएंट ही खतरनाक

संयुक्त राष्ट्र, । कोविड-19 के बी.1.617 स्ट्रेन का डेल्टा यानी बी.1.617.2 वैरिएंट ही दुनिया के लिए चिंता का विषय है। यह तथ्य विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अध्ययन में सामने आया है। ज्ञातव्य है

छिन सकती है नेतन्याहू की कुर्सी, इजराइल में सरकार बनाने के लिये विरोधी विचारधारा के दल एकजुट हुए

यरुशलम । करीब दो हफ्ते पहले जब इजराइल देश में सबसे बुरे सांप्रदायिक तनाव से जूझ रहा था, गाजा से रॉकेटों की बौछार हो रही थी, तब कौन सोच सकता था कि वामपंथी, दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी जैसी विरोधी विचारधार