एक सप्ताह से वातावरण में छाया हुआ है धुंआ, सुबह धूप का कम और धुंआ का असर ज्यादा


नर्मदापुरम ( निप्र)। बीते एक सप्ताह से अधिक समय हो गया धुंआ का असर वातावरण में बना हुआ है। प्रतिबंध के बावजूद मूंग बोने की जल्दबाजी में कुछ किसानों द्वारा खेतों में जलाई जाने वाली नरवाई का धुंआ इतना फैल रहा है कि गांवों से लेकर शहर तक धुंआ ही धुंआ हो रहा है। सुबह से ऐसा लगाता है कि पूरे शहर में धुंध छा गई हो। कई लोगों ने आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होना भी मेहसूस कर रहे हैं। नर्मदा तट के घाटों पर तो यह स्थिति यह हो जाती है कि घाट से दूसरा छोर ही नजर नहीं आता है। सुबह से दोपहर तक विंध्याचल पर्वत नजर ही नहीं आता है।

पहले कुछ कम था अब पूरे शहर में धुआं फैलता जा रहा है। हर कोई यह जानने की कोशिश कर रहा था कि यह धुंआ कहां से आ रहा है। कोई इसे पहाड़ में लगी आग का धुंआ मान रहा था कोई नरवाई की आग से उत्पन्न धुंआ मान रहा था। प्रशासनिक स्तर पर भी धुएं को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। बाद में खुलासा हुआ कि नरवाई का धुआं शहर में फैला है। बताया जा रहा है आसपास के इलाकों में नरवाई जलाई जा रही है जिसके कारण धुआं फैल रहा है। यह सब चोरी छिपे नरवाई में आग लगाने का परिणाम है। डॉ आर गंगराड़े और पूर्व सिविल सर्जन रवि शर्मा ने कहा कि धुंआ किसी भी चीज का हो स्वाथ्य पर विपरीत असर पड़ता है। स्वांस में धुंआ जाने से घबराहट भी बढ़ सकती है।

अभी कम होने की संभावना कम

अभी तो रबी मौसम की मुख्य फसल गेहूं की कटाई हो रही है। जैसे-जैसे कटाई हो रही है गेहूं निकालने के बाद किसान को मूंग की बोवनी की जल्दी रहती है इसलिए खेत से नरवाई को हटाने का सबसे सरल तरीका आग लगाने का होता है इसलिए शाम के समय चुपके से नरवाई में आग लगा दी जाती है। जिससे रात भर में खेत की नरवाई साफ हो जाती है। लेकिन कृषि विज्ञानी केके मिश्रा ने कहा कि नरवाई में आग लगाने से खेत की उर्वरा क्षमता कम हो रही है। थोड़े से लालच के पीछे इस तरह का आचरण ठीक नहीं है।

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