एक वर्ष से संचालित हो रही अस्पताल में हेल्पडेस्क अब शुरू होने लगी लापरवाही

दूर-दराज से आने वाले मरीज और परिजन होते हैं परेशान

नर्मदापुरम (निप्र)। लगभग एक वर्ष से जिला अस्पताल में हेल्प डेक्स शुरू हुई है। इसकी पहल कलेक्टर ने की है। लेकिन कुछ दिनों तक ठीक से कार्य करने वाली हेल्प डेस्क अब नाम की रह गई है। मरीजों और मरीजों के साथ आने वाले परिजनों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन व जिला अस्पताल के द्वारा एक हेल्प डेस्क शुरू की गई है। जिला रेडक्रास प्रबंध समिति की बैठक में जनहित के मुद्दों पर निर्णय लेकर हेल्प डेस्क शुरू की गई। जिससे कुछ दिनों तक तो अच्छा कार्य होता रहा। इसके बाद यहां पर बैठने वाले कर्मचारी टालमटोली करने लगे। यदि कोई मरीज और उनके परिजन अस्पताल संबंधी कोई जानकारी लेना चाहते हैं तो हेल्प डेस्क पर कोई मिलता नहीं है यदि दाएं-बाएं खोजने पर मिल भी जाएं तो उन्हें ही नहीं मालुम रहता है कि मरीज कहां जाएं किससे मिलें। इसलिए हेल्प डेस्क नाम की रह गई है। उसे सुचारू रखने के लिए जिला प्रशासन से अधिकारियों को जाकर पूछताछ करना चाहिए जिससे कि पता चल सके कि हेल्पडेस्का कोई मतलब निकल रहा है या नहीं। जिला जिला अस्पताल में मरीजों व उनके परिजनों की सहायता के लिया हेल्प डेस्क संचालित किए जाने का निर्णय अच्छा है लेकिन उसका लाभ वास्तविक लेागों को मिलना चाहिए। कलेक्टर नीरज सिंह ने कहा था कि अस्पताल में आए मरीजों के परिजनों की सहायता के लिए हेल्प डेक्स में बैठने वाले सहयोगी बनेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। लोग पूछते रहते हैं। उन्हें सही जानकारी नहीं मिलती है। जिला अस्पताल में तीन जिलों के हजारों मरीज और उनके परिजन आते हैं। लेकिन उन्हें भटकना पड़ता है।



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