उम्मीदों का डिजिटल सेतु


कोरोना संकट के चलते आर्थिक सुस्ती के दौर में, डिजिटल इंडिया मुहिम को गति देने के क्रम में गूगल द्वारा भारत में दसअरब डॉलर का निवेश सुकून देने वाला है। इस निवेशकी पहली किश्त रिलायंस उद्योग की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म के खाते में गई है। दरअसल, गूगल समूह के सीईओ सुंदर पिचाई ने इसी सप्ताह के आरंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करके निवेश की इच्छा जताई थी। निस्संदेह गूगल के डिजिटलीकरण कोष के तहत भारत में होने वाला यह बड़ा निवेश है, जिसमें 33,750 करोड़ रुपये के निवेश से अमेरिकी दिग्गज कंपनी को रिलायंस की संगीत, मूवी एप्स और टेलीकॉम वेंचर चलाने वाली इकाई में 7.7 फीसदी की हिस्सेदारी मिलेगी। इससे पहले भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार के कई बड़े खिलाडिय़ों ने बीते कुछ समय में जियो प्लेटफॉर्म में निवेश किया था, जिसमें फेसबुक व इंटेल कॉर्प जैसी कंपनियां शामिल रहीं। निश्चय ही ये कंपनियां विशाल भारतीय बाजार में बड़ी संभावना देख रही हैं। गूगल ने भी इसी दिशा में लाभ की संभावनाओं को देखते हुए निवेश का निर्णय लिया है। लेकिन यहां आवश्यक है कि इन उपक्रम का लाभ राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप हो और आम आदमी को भी इस लाभ में हिस्सेदारी मिले। यहां यह महत्वपूर्ण है कि गूगल और जियो का यह तालमेल भारतीय उपभोक्ताओं के लिये आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो। दरअसल, गूगल और जियो भारत में कम लागत वाले फोर-जी व फाइव-जी स्मार्टफोनों के लिये एंड्रॉयड-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने के लिये सहयोग करेंगे, जिसके चलते भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों के मुताबिक स्मार्टफोनों का निर्माण किया जा सकेगा। विडंबना यह है कि आज भी देशकी एक-चौथाई आबादी के पास टू-जी फीचर वाले फोन मौजूद हैं, जिनका उपयोग स्मार्टफोन की उन्नत कार्यक्षमता के रूप में नहीं किया जा सकता।

निस्संदेह देश में व्याप्त आर्थिक विषमता के चलते जिस बड़े तबके के पास ये सुविधा नहीं है, उन्हें स्वदेशी तकनीक वाले स्मार्टफोन उपलब्धहो पायेंगे। दरअसल, देश के जिस कमजोर तबके को सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता डिजिटल माध्यम से पहुंचायी जा रही है, उसे भी नई तकनीक की सुविधा मिलनी चाहिए। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इस बड़े निवेश के साथ जहां आत्मनिर्भर भारत का संकल्प पूरा होगा, वहीं इससे देश में रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि की उम्मीद की जानी चाहिए। कोशिश हो कि आधुनिक युग में डिजिटलीकरण की प्रक्रिया से जहां समाज सशक्त हो, वहीं उस ज्ञान को विस्तार मिले, जो हमारी अर्थव्यवस्था को गति दे सके। भारत सॉफ्टवेयर तकनीक में विश्व में सिरमौर बन सके। कोरोना काल में डगमगाती अर्थव्यवस्था को संबल देने के साथ ही, विश्व बाजार में भारत की दखल बन सके। वक्त की जरूरत है कि देश में अनुसंधान व विकास की संस्कृति का विकास हो और नवाचार को प्राथमिकता मिले। देश में वैश्विक स्तर के उन उत्पादों का उत्पादन संभव हो, जो दुनिया के लोगों के जीवन को बदलने में सहायक हो। यह भी जानने की कोशिश हो कि देश आज तक क्यों चीनी एप्स पर निर्भर रहा है। इसके बावजूद कि भारतीय प्रतिभाएं वैश्विक आईटी जगत की सिरमौर कंपनियों में सूत्रधार बनी हुई हैं। कोशिश हो कि भारत सूचना व संचार के क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि विश्व बाजार में कारोबार में दखल बनाने में कामयाब हो। हो सकता है कि कोरोना संकट के दौर में विदेशों में कष्टमय जीवन भोग रही भारतीय प्रतिभाओं को स्वदेश मोह वापस ले आये। फिर शायद भारत को भविष्य में फाइव-जी सेवाओं के लिये चीनी कंपनी हुआवे का मुंह न ताकना पड़े, जिससे अमेरिका-ब्रिटेन जैसे कई देश पहले ही किनारा कर चुके हैं। हालिया सीमा टकराव व चीन के खतरनाक मंसूबों को देखते हुए भारत के लिये जरूरी है कि हम इस दिशा में आत्मनिर्भर बने। फिर हम दुनिया को भी विश्वस्तरीय नेटवर्क देने की तरफ आगे बढ़ सकते हैं।

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