उतार-चढ़ाव के बीच

अनेक समस्याओं से जूझते हुए देश के नए उद्यमियों (स्टार्टअप्स) ने न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था में बल्कि विश्व स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। पिछले दिनों भारतीय रिजर्व बैंक ने एक सर्वेक्षण के जरिये उनकी विशेषताओं और चुनौतियों को रेखांकित किया। इस सर्वे के मुताबिक भारत में स्टार्टअप कल्चर अभी कुछ ही राज्यों में जोर पकड़ सका है। नवंबर 2018 से अप्रैल 2019 के दौरान 1246 प्रतिभागियों के बीच किए गए सर्वे में तीन चौथाई प्रतिभागी महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और दिल्ली से थे। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार इनमें 50 प्रतिशत इकाइयां कृषि, डेटा एनालिसिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी/समाधान और विनिर्माण क्षेत्र की थीं। उनमें से एक चौथाई का सालाना कारोबार दस लाख रुपये तक था। पांच में एक से भी कम स्टार्टअप का सालाना टर्नओवर एक करोड़ से ऊपर है। इनमें 43 फीसदी ने अपनी निजी पूंजी से या परिवार और दोस्तों से मदद लेकर कारोबार शुरू किया।

इंटरनैशनल फंडिंग केवल 13 प्रतिशत को हासिल है जबकि अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक ऋण 1.7 फीसद को ही मिल सका है। भारतीय स्टार्टअप क्षेत्र का उतार-चढ़ाव देखना हो तो शुरू में इसने तेज रफ्तार पकड़ी, फिर अचानक कई कंपनियां बंद हुईं जिससे लगा कि नए कारोबारियों के लिए देश में कोई गुंजाइश ही नहीं है। इधर एक बार फिर इस क्षेत्र में सुगबुगाहट आई है। पारंपरिक उद्यमियों ने संघर्ष के दिनों को झेलने के लिए कई व्यवस्थाएं बना रखी हैं पर नए उद्यमी अक्सर छोटी चुनौतियों का सामना होते ही लडख़ड़ाने लगते हैं। दरअसल नए उद्यमियों को कई तरह की बारीकियां समझनी पड़ती हैं और एक जटिल सिस्टम से निपटना सीखना होता है। इसके अलावा उन्हें धंधे में पहले से जमे लोगों के साथ होड़ में भी उतरना पड़ता है।

ऐसे में उन्हें सरकार से भरपूर सहयोग मिलना जरूरी है। मोदी सरकार ने बड़े जोर-शोर से स्टार्टअप इंडिया शुरू किया लेकिन इसका जितना लाभ उन्हें मिलना चाहिए था, वह मिल नहीं पा रहा। कुछ समय पहले लोकल सर्कल्स नाम की संस्था के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि स्टार्टअप इंडिया का लाभ सिर्फ 18 प्रतिशत स्टार्टअप्स को मिल रहा है। इसके अनुसार नौकरशाही के टालू रवैये और भ्रष्टाचार से नए उद्यमी परेशान हैं। 45 प्रतिशत स्टार्टअप्स का मानना है कि भ्रष्टाचार और सरकारी अक्षमता उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। सर्वे के मुताबिक एंजेल टैक्स का मामला स्टार्टअप के लिए नुकसान पहुंचाने वाला रहा है। उनका सारा ध्यान और समय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नोटिसों का जवाब देने में जा रहा है और वे अपने प्रॉडक्ट या सर्विस पर फोकस ही नहीं कर पा रहे। सरकार को उनके लिए कुछ ऐसी ठोस व्यवस्था बनानी चाहिए कि वे खराब दौर भी झेल ले जाएं।

0 views0 comments