इस हकीकत से सामना

तो महाशक्ति की यह वास्तविक तस्वीर है। इसके बीच परोक्ष कर लगातार हर व्यक्ति की वास्तविक आय घटाते हैँ। जिस समय हर चीज महंगी हो रही है, तो जिनकी आय कम है, उनकी आय और घट गई है। ऐसे में तबाही और दुर्दशा की आंध्र प्रदेश जैसी तस्वीरें उभरने लगें, तो उसमें क्या आश्चर्य है?

आंध्र प्रदेश से आई ये खबर झकझोर देने वाली है कि वहां बढ़ती बदहाली के बीच गरीब परिवार अपने नवजात बच्चों को बेच रहे हैँ। अभी तक सामने आई जानकारी के मुताबिक नवजात बच्चों को 70 हजार से एक लाख रुपये तक में बेचा गया है। खबर यह भी है कि खरीदार ने एक दूसरे खरीदार को एक लाख रुपये में खरीदी एक बच्ची को तीन लाख रुपये में बेच दिया। उस खरीदार ने एक अन्य खरीदार को उसी बच्ची को पांच लाख रुपये में बेचा। इस समय देश का एक बड़ा तबका भारत के महाशक्ति और विश्व गुरु बनने खुमार में है। इसलिए ऐसी खबरें उसे महत्त्वपूर्ण लगेंगी, इसकी कोई संभावना नहीं है। लेकिन देश की असल हकीकत यही बढ़ती हुई बदहाली है। समझा जा सकता है कि लोगों की प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से घट रही आमदनी के कारण ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ेंगी। इस संबंध में कुछ आंकड़े गौरतलब हैं। भारत की प्रति व्यक्ति आय 2019-20 में 95,566 रुपये सालाना थी, जो 2020-21 में 86,659 रुपये रह गई। तो यह प्रत्यक्ष गिरावट है। अप्रिय यथार्थ यह है कि भारतीय जनता का बड़ा हिस्सा आज भी गरीब है।

सेंटर ऑफ मोनटरिंग ऑफ इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के एक ताजा अनुमान के मुताबिक भारत में सिर्फ 9 प्रतिशत ऐसे परिवार हैं, जिनकी सालाना आमदनी पांच लाख रुपये से अधिक है। दस लाख रुपये से ज्यादा सालाना आमदनी वाले परिवार एक प्रतिशत से भी कम हैँ। 16 प्रतिशत परिवारों की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम है, जबकि 25 फीसदी परिवारों की आय एक से दो लाख रुपये के बीच है। भारत में परिवारों की कुल संख्या 25 करोड़ है। इस लिहाज से अनुमान लगाएं तो देश में मुश्किल से दो करोड़ लोग ऐसे होंगे, जो आराम की जिंदगी गुजारते हैँ। पिछले साल अमेरिकी संस्था पिउ रिसर्च ने बताया था कि कोरोना महामारी के पहले भारत में मध्य वर्ग की संख्या 9 करोड़ थी, जो महामारी के बाद छह करोड़ रह गई। तो महाशक्ति की यह वास्तविक तस्वीर है। इसके बीच परोक्ष कर लगातार हर व्यक्ति की वास्तविक आय घटाते हैँ। जिस समय पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी से हर चीज महंगी हो रही है, जिनकी आय कम है, उनकी आय और घट गई है। ऐसे में तबाही और दुर्दशा की आंध्र प्रदेश जैसी तस्वीरें उभरने लगें, तो उसमें क्या आश्चर्य है?



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