आर्यन: मोदी राज का सार!

हरिशंकर व्यास

शाहरुख खान और उनका मेमना आर्यन भारत आज का पर्याय हैं। वह भारत, जिसकी मानसिक अवस्था में मनुष्य गरिमा, मानवाधिकार, सत्य का अर्थ खत्म है। पशु और मनुष्य का फर्क समाप्त है। इसलिए कि राष्ट्र जीवन उस एनिमल फार्म में परिवर्तित है, जिसमें मानवीय दिमाग, मर्यादा, संस्कार व संवेदना सब कुछ विलुप्त है। यों एनिमल फार्म में कई बाड़े हैं लेकिन मोटा- मोटी सन् 2022 का भारत चार बाडों में जी रहा है। एक, रोटी-नमक-हजार-दो हजार रुपए की खैरात से बेसुध 80-100 करोड़ लोगों का बाड़ा। दो, उन देशद्रोहियों, सेकुलरों, पाकिस्तानियों का बाड़ा, जिनकी प्रताडना से वोट है और सत्ता का टारगेट है। तीन, शासकों-भक्तों का वह प्रभु वर्ग, जिसने लुटियन दिल्ली को लंगूर दिल्ली बनाया है, जहां शासन-भ्रष्टाचार के विचार अंडरवर्ल्ड शासन शैली, पशुगत रंगदारी और गिद्ध लोक का ताना-बाना है। परिणामत: भारत माता और उसकी संतानों का खंड-विखंड, भयाकुल और बेबस भविष्य निश्चित। लोकतंत्र दिखावे का। संस्थाएं-लाठी शासन के अंडरवर्ल्ड का औजार। विचार, बहस, बुद्धि, मानवीय गरिमा सब खूंटी पर ताकि भारतीयों में यह विवेक बचे ही नहीं कि क्या सत्य है और क्या झूठ! इन तीन बाड़ों के बाद चौथा बाड़ा उन लोगों का है, जो मध्य वर्गी पुरुषार्थ, बुद्धि, समझ में आधुनिक मनुष्य की मानवीय गरिमाओं, सत्य के सनातनी जीवन का कभी सपना पाले हुए थे लेकिन अब भय और बेबसी के डीएनए से वापिस उस हिंदू प्रवृत्ति में वक्त काट रहे हैं कि 'होइहे सोइ जो राम रचि राखा या 'कोउ नृप होई हमै का हानि!

बहुत खराब!

सचमुच आप भी दुनिया के 195 देशों के वर्तमान और आजाद भारत व ज्ञात हिंदुस्तानी इतिहास में ढूंढे कि कब और कहां मनुष्यों के देश का गिद्ध देश के रूप में रूपांतरण हुआ? हम हिंदुओं ने रावण-दुर्योधनों की कहानी और गजनी, चंगेज खान, औरंगजेब, नादिरशाह की बर्बरताओं का अनुभव किया है, मुगलों-अंग्रेजों व उनके हाकिमों-कोतवालों की लूट और शोषण को झेला है पर क्या कभी यह सुना कि किसी राजा, आक्रामक बादशाह, अंग्रेज गवर्नर-जनरल या प्रधानमंत्री और सरकार ने देश विशेष के लोगों को गिद्धों, अंडरवर्ल्ड शासन शैली से नौजवान मेमनों को गोश्त हॉट पॉट पर ला पटका और फिर राष्ट्रव्यापी नैरेटिव से मासूमों का जीवन हलाल किया!

मैंने 30 अक्टूबर 2021 को आर्यन के प्रकरण पर 'गिद्ध देश के शीर्षक में ये लाइनें लिखी थीं-

'सॉफ्ट गोश्त.. कुछ मासूमियत और तरूणाई में कुरकुरा, परवरिश से मुलायमज्. गर्म खून में हौले-हौले पका और लालज् वाह मेमना लाजवाबज्फडफ़ड़ाता, रोता, कलपता और निर्विकार, निर्जीव सा इस ख्याल में खोया कि लोग मुझे किंग का मेमना बताते थेज् मैं मुगालते में दुनियादारी से दूर, मेमनों-बकरियों के साथ मस्त थाज्लेकिन यह क्या? ऊपर से अचानक झपटा और समझ पाता उससे पहले ही उधड़ी खाल के साथ जंगल की गोश्त हॉट पॉट में पटका हुआज् भीड़ मुझे कैसे देख रही है.. खबर जंगल में आग की तरह फैली है। भेड़-बकरियों के बाड़े के सबसे बड़े महानायक का मेमना गोश्त हॉट पॉट में घायल पड़ा है। सुनो, सुनो, देखो-देखो गोश्त के साथ मेरी सेल्फीज्.देखो मेमने का चेहराज् देखो उस बहादुर बाज को, जिसने देशद्रोही को उठा ला पटका।

जंगल भौं-भौ, कांव-कांव से सनसनाता हुआज्ज् सुना, पता है जंगलवासियों, वह मेमना नहीं माफिया हैज् अधर्मी है, दुराचारी है, यह उसी भेड़ का बेटा है जो नाचता-कूदता और दिल को धड़काता था। जो मोटा है, कलदार खरबपति है,ज् देखो उसका भी चेहरा देखोज्वह नजर नहीं आ रहाज्आओ, गाओ, मन्नत मनाओ जल्द हलाल हो यह मेमना!

अरे पर कौवे बता रहे हैं पहले गिद्ध पंचायत बैठेगी!ज् पहले छोटा राजा सुनेगा, फिर मझोला.. फिर आलाज्और गिद्ध राजा को भी तो अभी तय करना है कि करना क्या है? बैठेगी पंचायत, गिद्धों की गवाही होगी, कौवे जिरह करेंगे और गिद्ध राजा का फैसला होगा तभी राजभोग लगेगा..जंगल में प्रसादी बंटेगी! ज् यह मेमना इतिहास दुरूस्त होने का मौका हैज् हमारे गिद्धों का पुण्य है जो इतने मोटे, कलदार, रसूखदार, महानायक के मेमने का गोश्त बना दुनिया को जतला दे रहे हैं कि हमसे सभ्य, संविधानसम्मत दूसरा कोई नहीं। पृथ्वी के बाकी जीव ईर्ष्या कर रहे हैं। ऐसी देश रचना भला और कहां, जहां खरबपति भी गोश्त है, खिलाड़ी भी गोश्त है, महाकलाकार भी गोश्त! ज्.तभी तो पृथ्वी के बाकी जीवों और खासकर इंसानी सभ्यताओं के लिए अपना गिद्ध लोक सुदर्शनीय है। सबसे अलग, सबसे न्यारा।'

और पिछले सप्ताहज्. मालूम हुआ मेमना निर्दोष है!

कल्पना करें कैसे बॉलीवुड के कथित किंग शाहरुख खान का मेमना बचा होगा? किसने कैसे-कैसे नोचा होगा? क्या शाहरुख खान की हिम्मत है जो अपनी और अपने बेटे की इज्जत का बदला लें, हर्जाना मांगें? नहीं! संभव नहीं है। जान बची तो लाखों पाए और चलो, विदेश में बसें!

यह अनुभव नरेंद्र मोदी के आठ साला राज का सत्व-तत्व है। आर्यन प्रकरण पर जब देश का आकाश गिद्धों की गूंज से पटा पड़ा था तब एक मुसलमान नवाब मलिक और एक शिव सैनिक संजय राउत ने बोला था कि कैसे पैसों की राजधानी मुंबई में नई अंडरवर्ल्ड शासन शैली का रंगदारी नेटवर्क काम कर रहा है। महानगर में वे चेहरे चिन्हित हैं, जो दिल्ली का खौफ दिखा कर, एजेंसियों के अफसरों के संग इज्जतदारों को धमकाते हैं कि छापे पड़वा देंगे, बदनाम कर देंगे, जेल में डलवा देंगे। हां, मुंबई और पैसे वालों के जितने किस्से सुनेंगे तो दिमाग भन्ना जाएगा कि कैसे एक सेठ को धमका कर दूसरे को एयरपोर्ट ट्रांसफर होता है, कैसे ठेके जाते है, नीलामियां होती है और मेमनों से किंग खान लाइन हाजिर होते हैं।

उफ! क्या भारत का हिंदू (फिर भले वह शासक हो, अफसर, पत्रकार, वकील और मीडिया हो) सचमुच ऐसा जानवर हो सकता है जो छोटे-छोटे मेमनों को पकड़, खाल उधेड़ कर उन्हें जंगल के गोश्त हॉट पॉट में पटक कर पहले तो उसका राष्ट्रीय नैरेटिव बनाए। फिर परिवार, बाप को सताए और वसूली व रंगदारी की झपटमारी करे? वह भी इक्कीसवीं सदी में?

क्या ऐसा मुगल, अंग्रेज, कांग्रेस के राज में था? सन् 2014 से पहले तक भारत में भ्रष्टाचार काम के एवज में पैसे लेने का था। पैसा दो काम कराओ! पैसा नहीं दोगे तो फाइल नहीं बढ़ेगी। लेकिन ईश्वर की कसम ले कर हर हिंदू सोचे कि पहले कब ऐसा हुआ कि केंद्र सरकार की एजेंसियों के अफसर मोटे आसामी-खरबपति किंग शाहरुख खान के मेमने की खाल उधेड़ कर गोश्त हॉट पॉट पर ला पटकें और सरकार व प्रजा जश्न मनाए! पूरे देश के आकाश में गिद्धों-कौवों की यह कांव-कांव हो-देखो उस बहादुर बाज को, जिसने देशद्रोही को उठा ला पटका। ..वह ड्रग माफिया, अधर्मी है, दुराचारी है।

बॉलीवुड का किंग हो या मुंबई का खरबपति अंबानी (याद है वह खबर कि घर के पास बारूद की छडिय़ां बरामद) या बेंगलुरू का अरबपति सिद्धार्थ (जिसने 2019 में इनकम टैक्स के गिद्धों सें तंग आ कर आत्महत्या की) या अरूणाचल का सीएम (जिसने 2016 में गिद्धों के नोचने के अनुभव लिख कर आत्महत्या की) या वह रिया चक्रवर्ती, इन सबसे क्या प्रमाणित है? भारत आज न केवल पानीपत की लड़ाई का अखाड़ा है, बल्कि वह एनमिल फार्म भी है, जिसमें मनुष्य नोचते-उड़ते गिद्धों का मेमना है। फिर मेमना हिंदू हो या मुस्लिम? खरबपति हो या किसान!

ऐसा इसलिए क्योंकि शासन शैली में अंडरवर्ल्ड के तौर-तरीकों याकि धमकाने, रंगदारी, वसूली के अखिल भारतीय नए सिस्टम से गिद्ध स्वतंत्र-स्वच्छंद हो गए हैं। मोदी-शाह को अंदाज नहीं है कि उन्होंने भारत को क्या बना डाला है और कैसे बहुत नीचे छोटे-छोटे कर्मचारी भी बड़े गिद्ध की तरह व्यवहार कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट आई। उसने दो टूक शब्दों में बताया कि हैदराबाद में पुलिस ने दिन-दहाड़े चार लोगों को फर्जी एनकाउंटर में मारा। याद करें कि पिछले आठ सालों में फर्जी एनकाउंटरों का भारत में कैसा आस्मां छूता रिकार्ड है। याद करें तमिलनाडु के उस दुकानदार को, जिसकी जरा सी जुर्रत पर खाकी वर्दी ऐसे टूट पड़ी की एनिमल फार्म के दूसरे भेडिय़ों, गिद्धों को भी गिला हुआ होगा कि हममें नोचने की ऐसी छप्पन इंची छाती नहीं!

भूल जाएं लिंचिंग के अखलाक जैसे चेहरे, मस्जिद विवादों और मुस्लिम आबादी को। वह पानीपत की लड़ाई के लिए चुपचाप पकती हुई कौम है। मगर याद करें सिख-हिंदू किसानों के आंदोलन को कैसे हैंडल किया गया? कैसे एक नौजवान लड़की दिशा रवि पकड़ी गई? उस पर टूल किट के एक जुमले में पूरे देश में गिद्धों का कैसा कान फाड़ू नैरेटिव बना था? कैसे किसान आंदोलन को खालिस्तानी आंदोलन करार दिया गया? छोटे-छोटे मासूम चेहरों मनदीप पुनिया, देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को बदनाम करके किस बेरहमी से जंगल के गोश्त हॉट पॉट में पटका गया। तापसी पन्नू पर छापे डाल कैसे डराया-धमकाया गया।

मुझसे एक चेहरा कभी नहीं भुलाया जाता। वह 84 वर्षीय बुजुर्ग-कंपकंपाए स्टेन स्वामी का है। कैसे उनको मारा गया! भूल जाए लिंचिंग को, पुलिस एनकाउंटर और हर प्रदेश में सीबीआई-ईडी-एनसीबी जैसी केंद्रीय एजेंसियों की छापामारी व नेता-अफसरों की गैंगों की रंगदारी वाली अंडरवर्ल्ड शासन व्यवस्था को और सोचें सिर्फ उन नौजवान-मासूम आर्यन या रिया चक्रवर्ती जैसे चेहरों को, जिनके अनुभव पूरी दुनिया में प्रमाणित करते हैं कि पृथ्वी पर ऐसा कोई देश नहीं है, जहां सामूहिक तौर पर, राष्ट्रीय स्तर पर सत्तावान, सिस्टम, अफसर, मीडिया, आए दिन यह आकाशवाणी बनवाते हैं कि हमसे है पृथ्वी का गिद्ध लोक! निर्दोष, बेबस, मासूम मेमनों का गोश्त हॉट पॉट! दुनिया में क्या है ऐसी कोई दूसरी जगह?

यदि हो तो जरूर मुझे जानकारी दे।

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