आरसीएस-उड़ान योजना से अब तक 35 लाख यात्री हुए लाभान्वित

उड्डयन क्षेत्र से जुड़ा रोजगार पोर्टल लॉन्च किया गया देश के सबसे ऊंचे एयर ट्रैफिक कन्ट्रोल टावर का उद्घाटन हिंडन और कलबुर्गी में नये हवाई अड्डों में परिचालन शुरू पीपीपी आधार पर एएआई के छह हवाई अड्डों को पट्टे पर देने के लिए मंजूरी दी गई 85 हवाई अड्डे अब एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्त एयरपोर्ट बन गये हैं

उड़ान-आरसीएस

01 जनवरी, 2019 से लेकर 10 दिसम्बर, 2019 तक 134 मार्गों पर परिचालन शुरू किया गया।

वर्ष 2019 में 07 दिसम्बर तक 10 एयरपोर्टों में परिचालन शुरू कर दिया गया, जिनमें से 4 एयरपोर्टों पर अपेक्षा से कम हवाई सेवाएं संचालित की जाती थीं और 6 एयरपोर्टों से कोई भी हवाई सेवा संचालित नहीं की जाती थी।

अपेक्षा से कम हवाई सेवाओं वाले एयरपोर्ट -लीलाबाड़ी, बेलगाम, पंतनगर और दुर्गापुर।

बिना हवाई सेवाओं वाले एयरपोर्ट - कुल्लू, कलबुर्गी, कन्नर, दीमापुर, हिंडन और पिथौरागढ़।

वर्ष 2019 के दौरान 335 मार्गों के ठेके दिये गये, जो 33 हवाई अड्डों (बिना हवाई सेवाओं वाले 20 एयरपोर्ट, अपेक्षा से कम हवाई सेवाओं वाले 3 एयरपोर्ट, 10 वाटर एयरोड्रोम) को कवर करते हैं।

आरसीएस-उड़ान योजना के तहत अब तक लगभग 34,74,000 यात्रियों ने उड़ानें भरी हैं। इसका सीधा असर प्रमुख हवाई अड्डों पर पड़ा है, क्योंकि छोटे हवाई अड्डों को विभिन्न बड़े शहरों से कनेक्ट कर दिया गया है। इसकी बदौलत हवाई सफर में लगने वाला समय काफी घट गया है और इसके साथ ही पर्यटन, चिकित्सा व धार्मिक यात्राएं करने वाले लोग काफी लाभान्वित हुये हैं।

अप्रैल से नवम्बर, 2019 तक मौजूदा एवं नये हवाई अड्डों के उन्नयन के लिए 304.49 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं।

बेलगाम, प्रयागराज, किशनगढ़, हुबली और झारसुगुड़ा हवाई अड्डे 'उड़ानÓ के तहत शुरू किये गये व्यस्ततम एयरपोर्ट हैं।

हवाई यातायात प्रवाह प्रबंधन - नियंत्रण एवं कमांड केन्द्र (एटीएफएम-सीसीसी)

अत्याधुनिक डिस्प्ले से युक्त नये हवाई यातायात प्रवाह प्रबंधन -नियंत्रण एवं कमांड केन्द्र (एटीएफएम-सीसीसी) को जून, 2019 में नई दिल्ली स्थित वसंत कुंज में परिचालन में ला दिया गया है। एटीएफएम कार्यान्वयन - राष्ट्रव्यापी केन्द्रीय हवाई यातायात प्रवाह प्रबंधन (एटीएफएम) प्रणाली वर्ष 2017 से ही चालू है। केन्द्रीय कमांड केन्द्र (सीसीसी) को 22 जून, 2019 से वसंत कुंज परिसर में चालू कर दिया गया है। सीसीसी को आवश्यक सहयोग उन सभी 36 प्रमुख हवाई अड्डों पर स्थित फ्लो मैनेजमेंट पोजिशन (एफएमपी) से प्राप्त होता है, जिनमें से 8 रक्षा एयरपोर्ट हैं। एटीएफएम प्रणाली सभी प्रमुख हवाई अड्डों के साथ-साथ एयरस्पेस वाले सभी सेक्टरों में हवाई यातायात के प्रवाह पर करीबी नजर रखती है। जब भी किसी हवाई अड्डे/एयरस्पेस सेक्टर में हवाई यातायात संबंधी ओवरलोडिंग के बारे में अनुमान व्यक्त किया जाता है, तो एटीएफएम प्रबंधक बड़ी सक्रियता के साथ एटीएफएम नियमों (प्रस्थान के समय जमीन पर विमान के परिचालन में देरी कर दी जाती है) को लागू कर देते है, ताकि यातायात संबंधी ओवरलोडिंग का ठीक से 'प्रबंधनÓ हो सके। अत: एटीएफएम से हवाई अड्डों और एयरस्पेस का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए सुरक्षा को बनाये रखने में मदद मिलती है। भारत ने मई 2018 में दिल्ली में आईसीएओ की एपीएसी एटीएफएम संचालन समूह की बैठक की भी मेजबानी की थी, जिसमें 13 एपीएसी देशों ने भाग लिया था।

भारत के लिए सीएनएस/एटीएम के आधुनिकीकरण की रूपरेखा

मई, 2019 में बोइंग और भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने भारत के लिए 10 वर्षीय संचार, मार्ग निर्देशन, निगरानी/हवाई यातायात प्रबंधन (सीएनएस/एटीएम) के आधुनिकीकरण की व्यापक रूपरेखा विकसित करने के लिए एक तकनीकी सहायता समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। समझौते का उद्देश्य एएआई के लिए एक रूपरेखा विकसित करना है, ताकि इसका इस्तेमाल एयरस्पेस क्षमता के इष्टतम उपयोग, संचार में वृद्धि एवं मार्ग निर्देशन, निगरानी एवं हवाई यातायात के प्रबंधन में निवेश के लिए सर्वोत्तम वैश्विक एवं स्थानीय प्रथाओं के आधार पर भारतीय राष्ट्रीय एयरस्पेस प्रणाली (एनएएस) के आधुनिकीकरण में एक मार्ग निर्देशन के रूप में किया जा सके। अमेरिकी व्यापार एवं विकास एजेंसी (यूएसटीडीए) से प्राप्त अनुदान के साथ 18 माह वाली परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा। एएआई ने एक तकनीकी कार्य दल का गठन किया है, जिसमें एयरलाइनों, हवाई अड्डा ऑपरेटरों, डीजीसीए, आईएएफ, आईएमडी के नामित सदस्य और एएआई के अधिकारी शामिल हैं। यह तकनीकी कार्य दल इस परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान बोइंग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर कार्य करेगा। इसकी प्रारम्भिक बैठक 22 से 25 जुलाई, 2019 तक दिल्ली में आयोजित की गई।


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