आज से शुरू होगा गणेश उत्सव, 10 दिन तक होगी पूजा

नर्मदापुरम (निप्र)। दो वर्ष बाद कोरोना से मुक्ति मिलने के बाद अब उल्लास व उमंग के साथ गणेश उत्सव मनाया जाएगा। जिसकी तैयारी जोरों पर है। शहर में गणेश उत्सव मनाने के लिए 100 से अधिक पंडाल सज रहे हैं। खासकर बच्चों में गणेश उत्सव की खासी धूम है। लगातार बारिश होने के कारण गणेश स्थापना स्थल पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। पुराणों में वर्णित है कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष के दौरान हुआ था। 10 दिन तक चलने वाला गणेश उत्सव 31 अगस्त से शुरू हो रहा है। पं श्रवण शर्मा ने बताया कि परंपरा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म मध्य काल के दौरान हुआ था इसलिये मध्याह्न के दौरान गणेश पूजा को प्राथमिकता दी जाती है। हिंदू समय को ध्यान में रखते हुए सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच की अवधि को पांच समान भागों में विभाजित किया गया है। गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापन और गणपति पूजा, दिन के मध्य भाग में की जाती है और वैदिक ज्योतिष के अनुसार गणेश पूजा के लिए यह सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। मध्याह्न के दौरान, गणेश भक्त विस्तृत अनुष्ठानपूर्ण गणेश पूजा करते हैं जिसे षोडशोपचार गणपति पूजा के रूप में जाना जाता है।

प्रतिमाओं और पंडाल सजाने को दिया जा रहा अंतिम रूप

प्रतिमा बनाने वाले कलाकारों ने मूर्तियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मूर्तिकार केशव शर्मा ने बताया कि शहर बालागंज और कोठीबाजार में भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा पूर्व वर्षों की तरह स्थापित हेागी। इस वर्ष भी अभी से तैयारियां शुरू की है। भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाने में उत्साह बना हुआ है।

बीते अनेक वर्ष से बनाए जा रहे मिट्टी के गणेश

शहर में लोगों में बीते अनेक वर्षों से मिट्टी के गणेश की स्थापना करने के प्रति जागरूकता आई है। कालेज में बीते 7-8 वर्षों से तथा अनेक स्थानों पर बीते 6-7वर्ष से सिर्फ मिट्टी के गणेश की प्रतिमा की स्थापना की जाती है। इतना ही नहीं कई घरों में तो बीते 10 वर्ष से अधिक समय से मिट्टी के गणेश बनाने के प्रति जागरूकता आ चुकी है। पीओपी का विरोध तो 12 वर्ष पूर्व से हो रहा है। पूर्व की तरह इस वर्ष भी मिट्टी के गणेश के प्रति लोगों में विशेष रूझान है।


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