अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से और मजबूत होंगे दिग्विजय सिंह


भोपाल,(आरएनएस)। गत दिवस चले घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। कांग्रेस अध्यक्ष पद के निर्वाचन की अधिसूचना एक-दो दिन में जारी होने वाली है।

17 अक्टूबर को निर्वाचन की औपचारिकता होगी। अशोक गहलोत ने जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाकर साफ तौर पर कहा कि वे कोचीन जाकर राहुल गांधी को मनाने का अंतिम प्रयास करेंगे यदि वे नहीं माने तो फिर कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में नामांकन दाखिल करेंगे। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी का इनकार करना तय है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष पद पर अशोक गहलोत और शशि थरुर के बीच मुकाबला होगा। अशोक गहलोत चूंकि गांधी परिवार की ओर से उम्मीदवार होंगे इसलिए उनका भारी बहुमत के साथ कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय है। अशोक गहलोत के अध्यक्ष बनने से सबसे अधिक लाभ दिग्विजय सिंह को मिलेगा जो उनके चार दशक पुराने मित्र हैं। यह करीब-करीब तय है कि दिग्विजय सिंह को फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनाया जाएगा। फिलहाल वे राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी भारत जोड़ो यात्रा के राष्ट्रीय समन्वयक हैं। दिग्विजय सिंह पहले भी कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं। अशोक गहलोत के अध्यक्ष बनने से मध्य प्रदेश कांग्रेस में भी समीकरण बदलेंगे। अशोक गहलोत का अध्यख बनना कमलनाथ के लिए दूसरा झटका होगा। कांग्रेस ने जेपी अग्रवाल को प्रदेश प्रभारी बनाकर वैसे भी कमलनाथ को दबाव में ला दिया है। अशोक गहलोत और कमलनाथ के बीच हमेशा औपचारिक और सामान्य संबंध रहे हैं।



इस कारण से कमलनाथ को अशोक गहलोत से संबंध बढ़ाने या उनसे काम निकलवाने के लिए दिग्विजय सिंह पर निर्भर रहना पड़ेगा। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दिग्विजय सिंह बेहद ताकतवर बन कर उभरेंगे। 2023 के टिकट वितरण और संगठन में पदों की नियुक्ति में दिग्व्जिय सिंह की कमलनाथ के बराबर ही चलेगी।



दिग्विजय सिंह अपनी ताकत का उपयोग प्रदेश की राजनीति में जयवर्धन सिंह को मजबूत करने में करेंगे।


संभव है जयवर्धन सिंह को भी मध्य प्रदेश कांग्रेस में बड़ी जवाबदारी मिले। इसके अलावा अशोक गहलोत के अध्यक्ष बनने का असर मध्य प्रदेश कांग्रेस पर इस तरह पड़ेगा कि अब ओबीसी वर्ग के नेताओं को अधिक महत्व मिलेगा। अशोक गहलोत माली समाज से हैं और ओबीसी वर्ग में आते हैं। मध्यप्रदेश में राजस्थान से आकर बसे लोगों को भारी संख्या निवास करती है। मध्य प्रदेश का राजस्थानी समाज सामान्य: भाजपा और संघ परिवार के साथ रहता है। अशोक गहलोत के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस इस समाज में अपनी पैठ मजबूत करने का प्रयास करेगी। अशोक गहलोत की सत्ता और संगठन दोनों का लंबा अनुभव है इस कारण से निश्चित रूप से कांग्रेस की राजनीति में बदलाव आएगा और कार्यकर्ताटों की बात अधिक सुनी जाएगी।


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