अलबेले राफेल की धुन


शमीम शर्मा

बचपन में जब कभी आसमान में हवाई जहाज उड़ता हुआ दिख जाया करता तो हम बच्चे वहीं सांस रोक कर खड़े हो जाया करते। और तब तक उस विमान को निहारा करते जब तक वह आंखों से ओझल न हो जाये। अब यह हालत पूरे देश की हुई। टीवी चैनलों ने उनकी आंखों से राफेल को ओझल होने ही नहीं दिया। अखबारों में भी राफेल ही उड़ता दिखा। लोग भी मुंह बाये देखते रहे। भारतीय न्यूज चैनलों ने राफेल की इतनी खूबियां गिनवाईं कि जितनी उसे बनाने वाले इंजीनियरों को भी नहीं पता होंगी।

यह कभी सोचा तक नहीं था कि एक दिन पूरा देश राफेलमय हो जायेगा। एकाध महानुभाव तो यह कहने में भी नहीं चूके कि राफेल का नाम रामफल रख दो। हैरानी तब और हुई जब एक आदमी ने अपने नवजात शिशु का नाम ही राफेल रख दिया।

किसी ने यह सवाल भी दागा है कि महाभारत से लेकर राफेल तक सारे लठ बजवाने वाले सिस्टम हरियाणा में ही क्यों रखे जाते हैं। भारत की भूमि पर राफेल के चरण पड़ते ही इतना स्वागत किया, जितना नदीद में किसी की शादी होने पर उसकी बहू का भी नहीं किया जाता। यह और बात है कि इधर राफेल उतरा और उधर कइयों को लगा कि उनकी छाती पर ही उतर रहा है। राफेल की जय सुनते ही कइयों के दिल में भय पनपने लगा।

टीवी के महारथियों ने दो-चार दिन में ही राफेल विमानों की बारीकियों तक का इतना ज्ञान दे दिया कि लगता है हरियाणा के बेरोजगार अपने गांव के नुक्कड़ पर राफेल का सर्विस सेंटर खोलकर आजीविका कमाने लगेंगे। कई मनचले तो दो घूंट भरते ही बोलने लगे—आज तै तेरा यो फूफा राफेल उड़ावैगा। राफेल चोरी से आया है या ईमानदारी से, इस बारे में तो राजनेता मंथन करने में जुटे हैं पर इतने कीमती विमान की चौकीदारी तो करनी ही पड़ेगी।



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