अब नर्मदा और तवा की जलधारा के अंदर पक गई रेत, तेजी से बाहर आएंगे रेत के खेत

मौका पाते ही माफिया मुनाफा कमाने के लिए हो रहे आतुर, एक दो ट्राली पकड़कर थपथपाते हैं स्वयं की पीठ

नर्मदानुरम (निप्र) । नर्मदा व तवा दोनों प्रमुख नदियों में इस बार बार-बार बाढ़ आती रही है। जिससे बड़ी मात्रा में रेत आकर जलधारा के नीचे जाते ही निकलने लगी है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि रेत के खेत निकलने वाले हैं जिसे काटने अर्थात मुनाफा कमाने के लिए शासन के साथ ही माफिया भी तेजी से सक्रिय होने लगा है। यह है बिना पैसे की रेती की खेती। जिससे शासन को करोड़ो का मुनाफा बिना कुछ किए होगा। इस क्षेत्र के विकास के लिए जितनी राशि शासन से दी जाती होगी उससे कई गुना सिर्फ रेत ही दे देती है। उससे के बाद भी नर्मदा तट पर पिचिंग के लिए सिर्फ 7 करोड़ 61 लाख का प्रस्ताव दो वर्ष से भोपाल की फाइलों में धूल खा रहा है। बात की जा रही थी रेती की खेती की तो इस कारोबार से जुडे हुए नए पुराने, क्षेत्र के क्षेत्र के बाहर के दूसरे प्रदेश के रेतचोर व ठेकेदार तथा अनेक रेत माफिया जो यहां से लेकर भोपाल तक सफेद पोश बने फिरते हैं। उनका काला कारोबार संरक्षण में चलता है। जिसमें अनेक अधिकारी भी चोरी छिपे संलिप्त पाए जाते हैं। एनजीटी की रोक हो या शासन प्रशासन के आदेश होंं सभी माफिया के सामने बोने सिद्ध हो जाते हैं। क्योंकि एक बड़ा काकस इस कारोबार में ऐसा लगा रहता है जो सबसे बड़ा है तभी तो चाहे कांग्रेस की सरकार हो या भाजपा की माफिया नहीं डरे तो नहीं डरे। रात दिन चोरी करते रहते हैं। प्रशासन स्तर पर एक दो ट्राली नए कारोबार करने वालों की पकड़कर कर खानापूर्ति की जाती है। उसी से वाहवाही ली जाती है। स्वयं की पीठ स्वयं थपथपाते हैं।

तवा नदी में निमसाडिय़ां रेत खदान पर अवैध उत्खनन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल अर्थात एनजीटी की रेत उत्खनन पर रोक आदेश का नर्मदापुरम में मजाक बनकर रह गया है। रात के अलावा दिन में भी माफिया तवा और नर्मदा नदी से अवैध उत्खनन ओर परिवहन कर रहे। रेत चोर बेखौफ होकर कई वाहनों से रेत का परिवहन कर रहे। जिले का खनिज अमला भी इस बड़ी तादात में हो रहे अवैध उत्खनन व परिवहन से बेखबर है। या खबर होने के बाद भी डरा रहता है। विभाग केवल शहर में एक.दो अवैध रेत उत्खनन की ट्रैक्टर.ट्रॉली पकड़ खानापूर्ति कर रहा। रेत खदानों पर हो रहे उत्खनन पर खनिज विभाग कार्रवाई करने से क्यों बच रहा। यह सबको पता रहता है।

एनजीटी के आदेशानुसार 15 अक्टूबर तक नदियों से रेत का उठाव नहीं किया जाना है। कलेक्टर ने भी पिछले सप्ताह टीएल मीटिंग में अवैध उत्खनन रोकने के निर्देंश दिए। बावजूद तवा और नर्मदा नदी में कई जगह अवैध उत्खनन हो रहा है। अभी जल स्तर बढ़ा हुआ है कहीं कहीं थोड़ा कम हुआ है रेत देखकर माफिया की जीभ में पानी आ रहा है।

वह अपने गुर्गों को अवैध उत्खनन व परिवहन में लगा रहे हैं। कुछ वीडियो भी बना रहे हैं क्योंकि माफिया मानने वाला नहीं है वह जल धारा कम होने का इंतजार कर रहा है प्रशासन की कार्रवाई से वह डरने वाला न तो पहले था और न अब रहेगा। जहां रेत माफिया उत्खनन व परिवहन शुरू कर रहे हैं वहीं से कुछ लोग सक्रिय हो रहे हैं।

आने वाले समय में प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए या उनके छुटभैयों से हाथ मिलाकर अपना उल्लू सीधा करेंगे। क्योंकि वे हर कीमत पर रेत का कारोबार करेंगे ही।







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