अंपायर खेल नियंत्रित करते हैं, यह तय नहीं करते कि क्या स्वीकार्य है, क्या नहीं : संगकारा

मुंबई (ए)। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ शुक्रवार को आखिरी ओवर में हुए नो बॉल विवाद पर राजस्थान रॉयल्स के कोच कुमार संगकारा ने कहा कि अंपायर खेल को नियंत्रित करते हैं और वह यह तय नहीं कर सकते कि क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं।जॉस बटलर के शतक और प्रसिद्ध कृष्णा के तीन विकेट की बदौलत राजस्थान रॉयल्स ने वानखेड़े स्टेडियम में एक हाई-स्कोरिंग मैच में दिल्ली कैपिटल्स को 15 रनों से हराया।कुमार संगकारा ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मुझे लगता है कि यह अंपायर है जो खेल को नियंत्रित करता है। आईपीएल में बहुत दबाव और तनाव होता है। जब आपके पास ऐसी स्थिति होती है, तो चीजें किसी भी तरह से जा सकती हैं, अंत में, अंपायर स्थिति को नियंत्रित करते हैं। मुझे नहीं लगता कि मैं वास्तव में अंपायर यह तय कर सकते हैं कि क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं। दिल्ली कैपिटल्स को आखिरी छह गेंदों में 36 रनों की जरूरत थी, रोवमैन पॉवेल ने बाएं हाथ के तेज गेंदबाज ओबेद मैककॉय को ओवर की पहली तीन गेंदों में छक्का लगाया। तीसरी गेंद में, उन्होंने जो छक्का लगाया, वह फुलटॉस गेंद कमर के ऊपर थी, दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत और टीम प्रबंधन के अनुसार फुल टॉस नो-बॉल थी। लेकिन ऑन-फील्ड अंपायर ने नो-बॉल नहीं दी और यहां तक कि थर्ड अंपायर से सलाह लेने से भी इनकार कर दिया, इसलिए पंत ने मैच को रद्द करने की धमकी दी और पॉवेल और कुलदीप यादव दोनों को मैदान से बाहर आने के लिए कहा। इसके अलावा सहायक कोच प्रवीण आमरे मैदान में आ गए और अंपायर से बहस करने लगे। संगकारा ने कहा, अंत में, जो खिलाड़ी मैदान पर हैं उनका काम वहां खेलना है और अंपायरों का काम उस खेल को नियंत्रित करना है, जबकि सहायक स्टाफ के रूप में हमारा काम मूल रूप से खिलाडिय़ों का समर्थन करना और उन्हें खेलने देना है। बता दें कि राजस्थान रॉयल्स की टीम ने अपने सात में से पांच मैच जीत लिये हैं और अब वह अंकतालिका में शीर्ष पर पहुंच गई है।

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